मेरठ के कलीना गांव निवासी सौरभ चौधरी का सितारा इन दिनों बुलंदियों पर है। अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय स्पर्धाओं में लगातार स्वर्ण जीतकर सौरभ ने हर जगह देश का परचम लहराया है। वीर शाहमल एकेडमी बिनौली के दिलेर निशानेबाज 16 साल के सौरभ चौधरी ने कुवैत में तीसरा स्वर्ण पदक जीता। मिक्स्ड डबल में हरियाणा की मनु भाकर के साथ विश्व और एशियाई खेलों का रिकॉर्ड बनाया। उनकी इस कामयाबी पर एकेडमी में जश्न मनाया गया। कोच अमित श्योराण ने कहा कि वह बेहद खुश हैं।
'गोल्डन ब्वॉय' सौरभ चौधरी विदेशी निशानेबाजों पर पड़ रहे हैं भारी, कामयाबी पर दोस्तों ने मनाया जश्न
मेरठ के कलीना गांव के सौरभ चौधरी की कामयाबी का सफर 21 अगस्त को जकार्ता के एशियाई खेलों से शुरू हुआ। 16 साल के खिलाड़ी ने एशिया में पिस्टल के उस्ताद खिलाड़ियों को हैरान करते हुए स्वर्ण पदक जीता था। लेकिन सौरभ चौधरी ने धैर्य से लक्ष्य पर निगाह रखी और इसके बाद विश्व निशानेबाजी, यूथ ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता। उनके प्रशंसक अब उन्हें 'गोल्डन ब्वाय' बोलने लगे हैं।
कुवैत में व्यक्तिगत, टीम और मिक्स्ड स्पर्धा में तीन पदक जीतकर सौरभ ने अब तक पिछले करीब तीन माह में छह स्वर्ण पदक जीत लिए हैं। बिनौली स्थित एकेडमी पर स्वर्णिम सफर पर जश्न का माहौल है। कोच अमित श्योराण का कहना है कि सौरभ की कामयाबी उसके धैर्य और कड़े अभ्यास का नतीजा है। उन्हें उम्मीद है कि सौरभ का सफर जारी रहेगा। खुशी मनाने वालों में सचिन शर्मा, दीपेंद्र सिंह, नकुल शर्मा, हिमांशु, मोनू कुमार, अनुराग कुमार, सहदेव सिंह, रोहन और विशाल शामिल रहे। कलीना गांव में भी सौरभ के घर पर जश्न का माहौल है।
तीन साल में ही देश को मिल गया 'गोल्डन ब्वाय'
कुवैत में तीन स्वर्ण पदक समेत अब तक छह पदक जीत चुके किसान के बेटे के गोल्डन ब्वाय बन जाने का सफर सिर्फ तीन साल का ही है। कोच अमित श्योराण ने बताया कि साल 2015 में दिल्ली में आयोजित 59वीं नेशनल चैंपियनशिप में यूथ वर्ग का गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद सौरभ ने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। परिवार ने साथ दिया और पिस्टल खरीदकर दी।
कलीना में जन्मा और बिनौली में निखरा
सौरभ चौधरी ने रोज 12 किमी का सफर टैंपो से किया। मेरठ के कलीना गांव से बागपत के बिनौली तक वह रोज अभ्यास के आते थे। यहां करीब आठ घंटे तक नियमित अभ्यास करने से वह तपकर कुंदन बन गए। उनके भाई नितिन चौधरी के प्रयास से ही वह शूटिंग एकेडमी तक पहुंचे। साल 2016 में करेल के त्रिवेंद्रम में यूथ खेलों में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीतकर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। पहली बड़ी कामयाबी मिली साल 2017 में। 22 से 29 जून तक जर्मनी के सुहल में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में सौरभ ने स्वर्ण पदक जीता था।
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