भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान सरदार सिंह ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लिया और 12 साल के अपने लंबे करियर पर विराम लगाया। टीम इंडिया हाल ही में इंडोनेशिया में संपन्न 18वें एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने से चूकी थी। उसे पाकिस्तान पर जीत के साथ ब्रॉन्ज मेडल से संतुष्ट होकर देश लौटना पड़ा।
सरदार सिंह ने शनिवार को बताया कि क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर से फोन पर बातचीत से उन्हें राष्ट्रीय टीम में वापसी करने के लिए प्रेरणा मिली। तेंदुलकर ने सरदार को कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में टीम में शामिल नहीं होने पर फोन किया और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। महान बल्लेबाज की इस सलाह को मानकर सरदार सिंह राष्ट्रीय हॉकी टीम में वापसी करने में सफल रहे।
बता दें कि सरदार सिंह को 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय हॉकी टीम में जगह नहीं मिली थी। तब भारतीय टीम ब्रॉन्ज मेडल मैच में इंग्लैंड के खिलाफ 1-2 से हारकर चौथे स्थान पर रही। सरदार सिंह ने फोन पर सचिन तेंदुलकर से सलाह ली और इससे उन्हें कड़ी मेहनत करने की ऊर्जा मिली। इसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी में सरदार सिंह की टीम में वापसी हुई। भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी में सिल्वर मेडल जीता।
सरदार सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'सचिन पाजी मेरी प्रेरणा हैं। उन्होंने पिछले तीन-चार महीनों में मेरी काफी मदद की, जो काफी कड़ा समय था। ऐसा कोई मौका नहीं रहा जब उन्होंने मेरे फोन का जवाब नहीं दिया हो। कॉमनवेल्थ गेम्स में मुझे टीम में नहीं चुना गया, जिसके बाद मैं काफी निराश था। मैंने सचिन पाजी को फोन किया और पूछा कि वो अगर 0 पर आउट होते तो क्या करते? उन्होंने मुझे करीब 20 मिनट सलाह दी और कहा कि आलोचनाओं को भूलकर अपने खेल पर पूरा ध्यान लगाऊं व प्रोत्साहित रहूं। उन्होंने मुझे अपने पुराने वीडियोज देखने के लिए कहा ताकि मैं अपनी नैसर्गिक हॉकी खेलूं और इससे मुझे वापसी करने में काफी मदद मिली।'
सरदार सिंह ने 12 साल के करियर में 300 से अधिक बार भारतीय टीम की जर्सी पहनी। सरदार सिंह के मार्गदर्शन में टीम इंडिया ने इंचियोन एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा 2010 और 2018 में ब्रॉन्ज मेडल जीता। हालांकि, सरदार को मलाल है कि वह ओलंपिक मेडल नहीं जीत सके और एफआईएच प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड भी नहीं जीत सके। पूर्व धाकड़ मिडफील्डर ने कहा, 'मैं हमेशा से एफआईएच प्लेयर ऑफ द ईयर बनना चाहता था, लेकिन वह सपना ही रह गया। मैं हमेशा से ओलंपिक और विश्व कप मेडल जीतना चाहता था। यह भी मेरे सपने ही रह गए।'