फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

इस खास जगह तक पहुंच सकते हैं आप, बस दिमाग पर करना होगा नियंत्रण

Fri, 24 Nov 2017 03:43 PM IST
सद्गुरु जग्गी वासुदेव
सद्गुरु जग्गी वासुदेव Updated Fri, 24 Nov 2017 03:43 PM IST
विज्ञापन
consciousness or chetna is a dimension or aayaam and related to mind

यौगिक संस्कृति में कहा गया है कि यदि आप अपने चित्त को छू लेंगे या उस तक पहुंच जाएंगे, तो ईश्वर भी आपका दास हो जाएगा।

मन के अगले आयाम को चित्त कहते हैं। चित्त का अर्थ विशुद्ध प्रज्ञा व चेतना, जो स्मृतियों से पूरी तरह बेदाग हो। यहां कोई स्मृति नहीं होती है। हर तरह की बातें कही गई हैं, जैसे- ईश्वर बड़ा दयालु है, ईश्वर प्रेम है, ईश्वर यह है, ईश्वर वह है। एक क्षण के लिए सोचिए कि किसी ने भी ये सारी बातें आपसे न कहीं होतीं और आप बिना कुछ सुने या माने बस अपने आसपास की सृष्टि को ध्यान से देखते कि कैसे एक फूल खिलता है, कैसे एक पत्ती निकलती है और कैसे एक चींटी चलती है आदि।

consciousness or chetna is a dimension or aayaam and related to mind

यदि आप इन सारी बातों पर गौर करते, तो आपका इस निष्कर्ष पर पहुंचना तो निश्चित था कि इस सृष्टि का स्रोत जो भी है, उसमें अद्भुत इंटेलिजेंस है, वह प्रज्ञावान है। सृष्टि की प्रत्येक चीज में एक जबरदस्त इंटेलिजेंस है, जो हमारे इस दिमाग से काफी परे है। चित्त का संबंध चेतना से है। यदि आपका मन सचेतन हो गया और आपने चित्त पर एक खास स्तर का सचेतन नियंत्रण पा लिया, तो आपकी पहुंच अपनी चेतना तक हो जाएगी। हम लोग जिसे चेतना कहते हैं, वह दरअसल आयाम है, जो न तो भौतिक है और न ही विद्युतीय और न ही विद्युत चुंबकीय। यह भौतिक आयाम से अभौतिक आयाम की ओर एक बहुत बड़ा परिवर्तन है।

consciousness or chetna is a dimension or aayaam and related to mind

यह अभौतिक ही है, जिसकी गोद में भौतिक घटित हो रहा है। भौतिक तो एक छोटी सी घटना है, जो इस पूरे ब्रह्माण्ड का मुश्किल से दो फीसदी या शायद एक फीसदी हिस्सा ही है, बाकी तो सब अभौतिक ही है। इस अभौतिक को यौगिक शब्दावली में एक खास तरह की ध्वनि से जोड़ा जाता है। हालांकि, आज के दौर में यह समझ बहुत बुरी तरह से विकृत हो चुकी है, यह ध्वनि होती है ‘शिव’। शिव का अर्थ है, ‘जो है नहीं’। जब हम शिव कहते हैं, तो हमारा आशय पर्वत पर बैठे किसी इंसान से नहीं होता, बल्कि एक ऐसे आयाम से होता है, जो है नहीं, लेकिन इसी ‘नहीं होने’ के अभौतिक आयाम की गोद में ही सारी घटनाएं या चीजें घटित हो रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
consciousness or chetna is a dimension or aayaam and related to mind

यह हमारे भीतर मौजूद इंटेलिजेंस व प्रज्ञा का आयाम है, जो एक तरह से हमारे निर्माण का आधार है। यदि आप रोटी का एक निवाला खाते हैं, तो कुछ ही समय में वह निवाला इंसान में बदल जाएगा, क्योंकि यह इंटेलिजेंस और प्रज्ञा हमारे शरीर के अंदर मौजूद है। यौगिक संस्कृति में कहा गया है कि यदि आप अपने चित्त को छू लेंगे और अपनी इंटेलिजेंस के उस आयाम तक पहुंच जाएंगे, तो ईश्वर भी आपका दास हो जाएगा। फिर आपको यह सोचना नहीं पड़ेगा कि आप क्या चाहते हैं, जो चाहिए आपको उसकी तलाश भी नहीं करनी होगी।

विज्ञापन
consciousness or chetna is a dimension or aayaam and related to mind

यदि आप इस इंटेलिजेंस तक पहुंच गए, तब आप जिस चीज को भी जानने की इच्छा करेंगे, उसके बारे में जान जाएंगे। इसके लिए आपको अपना ध्यान सही दिशा में केंद्रित करने की जरूरत है। कोई इंसान इत्तेफाक से ही इस आयाम तक पहुंच पाता है। अब प्रश्न केवल यह है कि सचेतन तरीके से वहां कैसे पहुंचा जाए और वहां कैसे टिका रहा जाए। मन के ये आयाम पूरी तरह से मस्तिष्क में स्थित नहीं होते। ये पूरे सिस्टम में होते हैं। आठ तरह की स्मृतियां, बुद्धि के पांच और अहंकार यानी पहचान के दो आयाम व चित्त कुल मिलाकर मन के 16 हिस्से होते हैं। चूंकि, चित्त असीमित होता है, इसलिए यह सिर्फ एक ही होता है।

खुला पन्ना, अमर उजाला

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed