भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस को मनाया जाता है। गुरु और शिष्य की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस दिन शिष्य अपने गुरु के लिए कुछ विशेष करते हैं। हमारे देश में गुरु का स्थान भगवान से भी पहले है। आइए इस शिक्षक दिवस के खास मौके पर जानते हैं 10 गुरुओं और उनके शिष्य के बारे में...
Teachers Day 2019: ये हैं 10 महान पौराणिक गुरु
महर्षि वेदव्यास
प्राचीन भारतीय ग्रन्थों के अनुसार महर्षि वेदव्यास को प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है। तभी तो गुरु पूर्णिमा वेदव्यास को समर्पित है। महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के अवतार माने जाते थे। इनका पूरा नाम कृष्णदै्पायन व्यास था। महर्षि वेदव्यास ने ही वेदों, 18 पुराणों और महाकाव्य महाभारत की रचना की थी। महर्षि के शिष्यों में ऋषि जैमिन, वैशम्पायन, मुनि सुमन्तु, रोमहर्षण आदि शामिल थे।
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महर्षि वाल्मीकि
रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। महर्षि वाल्मीकि कई तरह के अस्त्र-शस्त्रों के आविष्कारक माने जाते हैं। भगवान राम और उनके दोनों पुत्र लव-कुश महर्षि वाल्मीकि के शिष्य थे। लव-कुश को अस्त्र-शस्त्र चलाने की शिक्षा महर्षि वाल्मीकि ने ही दी थी जिससे महाबलि हनुमान को बंधक बना लिया था।
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गुरु द्रोणाचार्य
महाभारत में धृतराष्ट्र और गांधारी के 100 पुत्रों और राजा पांडु के 5 पुत्र इनके शिष्य थे। द्रोणाचार्य एक महान धनुर्धर गुरु थे गुरु द्रोण का जन्म एक द्रोणी यानि एक पात्र में हुआ था और इनके पिता का नाम महर्षि भारद्वाज था और ये देवगुरु बृहस्पति के अंशावतार थे। अर्जुन और एकलव्य ये दोनो श्रेष्ठ शिष्य थे। अपने वरदान की रक्षा करने के लिए इन्होनें एकलव्य से उसका अंगूठा गुरु दक्षिणा के रुप में मांग लिया था। गुरु द्रोण देवगुरु बृहस्पति के अंशावतार थे। दुर्योधन, दु:शासन, अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर आदि इनके प्रमुख शिष्यों में शामिल थे।
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गुरु विश्वामित्र
विश्वामित्र महान भृगु ऋषि के वंशज थे। विश्वामित्र के शिष्यों में भगवान राम और लक्ष्मण थे। विश्वामित्र ने भगवान राम और लक्ष्मण को कई अस्त्र-शस्त्रों का पाठ पढ़ाया। एक बार देवताओं से नाराज होकर उन्होंने अपनी एक अलग सृष्टि की रचना कर डाली थी।
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