शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण क्यों होते हैं ? जानिए क्या है चांद की ये 16 कलाएं
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। आइए जानते हैं चांद की 16 कलाएं कौन-कौन से होती हैं।
विस्तार
इस वर्ष शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्तूबर 2026 को है। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा के त्योहार का विशेष महत्व होता है। यह साल भर में आने वाली सभी पूर्णिमा में सबसे खास माना जाती है। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा-अर्चना होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वीलोक में भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त और परिपूर्ण होता है। शरद पूर्णिमा की रात चांद की किरणों से अमृत के सामान वर्षा होती है। इस रात को खुले आसमान के नीचे खीर रखने की मान्यता हैं। केवल शरद पूर्णिमा पर ही रात को चांद अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। ऐसे में आइए जानते हैं चांद की 16 कलाएं क्या होती हैं और इसका क्या महत्व होता है।
चंद्रमा की 16 कलाओं का क्या है महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चांद अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। शास्त्रों के अनुसार चंद्रमा की 16 कलाएं उसकी पूर्णता की निशानी मानी जाती है। चंद्रमा की 16 कलाओं के दौरान चांद की 16 अलग-अलग अवस्थाओं को बताती हैं। जिस तरह से सूर्य से 7 तरह की किरणें निकलती है और हमें ऊर्जा देती हैं, उसी प्रकार चंद्रमा से 16 अलग-अलग तरह की किरणें निकलती हैं। यही 16 किरणों को चांद की 16 कलाएं होती हैं। चंद्रमा की ये 16 कलाएं पूर्ण स्वरूप का प्रतीक होती हैं। चंद्रमी की इन 16 कलाओं को भगवान श्रीकृष्ण ने भी धारण किया है।
शरद पूर्णिमा 2026 की तिथि, पूजा मुहुर्त और चंद्रोदय का समय
द्रिक पंचाग के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा का त्योहार 25 अक्तूबर 2026 को है। ऐसे में आइए जानते हैं, शरद पूर्णिमा की प्रमुख तिथियां और मुहूर्त।
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शरद पूर्णिमा 2026 |
तिथि और समय |
|---|---|
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शरद पूर्णिमा |
25 अक्टूबर 2026 |
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पूर्णिमा तिथि प्रारंभ |
25 अक्टूबर, सुबह 11:55 बजे |
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पूर्णिमा तिथि समाप्त |
26 अक्टूबर, सुबह 9:41 बजे |
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चंद्रोदय का समय |
शाम करीब 5:00 बजे |
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शुभ योग |
रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग |
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रवि योग |
सुबह 6:28 बजे से शाम 7:22 बजे तक |
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सर्वार्थ सिद्धि योग |
शाम 7:22 बजे से सुबह 6:29 बजे तक |
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कोजागर पूजा मुहूर्त |
रात 11:40 बजे से 12:31 बजे तक |
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खीर रखने का समय |
रात करीब 8:00 बजे |
चंद्रमा की 16 कलाएं और उनका महत्व
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16 कलाएं |
चंद्रमा की कला |
महत्व |
|---|---|---|
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1 |
अमृता |
अमरत्व और जीवन की निरंतरता का प्रतीक। |
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2 |
मंदा |
मन की स्थिरता और शांति का प्रतीक। |
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3 |
पुष्य |
सुंदरता और सौंदर्य के महत्व को दर्शाती है। |
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4 |
पुष्टि |
शरीर और मन के विकास एवं पोषण का प्रतीक। |
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5 |
तुष्टि |
संतोष और मानसिक शांति को दर्शाती है। |
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6 |
धृति |
धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक। |
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7 |
शशिनी |
चमक और ऊर्जा का प्रतीक। |
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8 |
धरा |
पृथ्वी पर जीवन के संचार और पोषण का प्रतीक। |
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9 |
कांति |
सौंदर्य और आभा का प्रतीक। |
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10 |
ज्योत्स्ना |
चंद्रमा की शीतलता और मंद प्रकाश का प्रतीक। |
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11 |
सुधा |
अमृत और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक। |
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12 |
चंद्रिका |
प्रकाश और नई दिशा से संबंधित। |
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13 |
श्री |
धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक। |
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14 |
ज्योति |
चमक, आभा और तेज का प्रतीक। |
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15 |
स्मृति |
अनुभवों और स्मरण शक्ति से संबंधित। |
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16 |
वपु |
सुंदरता, शरीर और स्वास्थ्य का प्रतीक। |