फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

परमहंस योगानंद: परमात्मा से मिलने का निमंत्रण

Fri, 01 Nov 2019 11:42 AM IST
विनोद शुक्ला विवेक आत्रेय
विवेक आत्रेय Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 01 Nov 2019 11:42 AM IST
सार

शरीर, मन और आत्मा के संतुलित और संपूर्ण विकास की ओर हमें ले जाता है योग।

विज्ञापन
paramhansa yogananda jayanti importance of yoga and meditation

शरीर, मन और आत्मा के संतुलित और संपूर्ण विकास की ओर हमें ले जाता है योग। इसका लक्ष्य केवल शारीरिक व्यायाम तक ही सीमित नहीं है, अपितु इसका अंतिम लक्ष्य है - ईश्वर के साथ मिलन।


पश्चिमी देशों में पहली बार योग के संदेश को संगठित रूप में पहुंचाने में योगदा सत्संग सोसाइटी के संस्थापक परमहंस योगानंद का नाम निर्विवाद रूप से लिया जा सकता है। 1920 में वे 27 वर्ष की उम्र में पहली बार अमेरिका गए और तभी से योग विज्ञान के प्रचार - प्रसार में लग गए। उनके योगदान के कारण वे पश्चिम में योग के जनक भी कहे जाते हैं। वे ताउम्र सक्रिय रहे और योग की शिक्षा देते रहे।

paramhansa yogananda jayanti importance of yoga and meditation

कई तरह की उक्तियां जैसे- मैं इस संसार रूपी नाटक का एक हिस्सा हूं,परंतु इससे अलग भी हूं। अभी प्रत्येक पल को पूरी तरह से जियो और भविष्य अपने आप संवर जाएगा, परमहंस योगानंद जी की आध्यात्मिक शिक्षाओं का हिस्सा है। इस तरह की प्रभावशाली शिक्षाओं के जरिए उन्होंने लोगों को खुद में सुधार लाने के लिए प्रेरित किया। लाखों भक्त उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करते हैं। इन शिक्षाओं ने लोगों के मन और आत्मा पर अनोखी और अमिट छाप छोड़ी है।  
    

paramhansa yogananda jayanti importance of yoga and meditation

कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो सर्वधर्म सभा में पहली बार भारतीय धर्म का परिचय दिया, जिसका लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा। जब भी स्वामी विवेकानंद की बात होती है तो शिकागो की धर्मसंसद में 1893 में उनके दिए गए  भाषण का उल्लेख जरूर होता है। यह सही है कि स्वामी विवेकानंद ने हिंदू या भारतीय धर्म के बारे में छाए अज्ञान को दूर किया लेकिन स्वामी योगानंद ने 1920 से शुरू कर धर्म के व्यावहारिक प्रयोग के साथ योग को कक्षा और पाठ्यक्रम की तरह भी लोगों तक पहुंचाया।इस योग विज्ञान को सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक पत्राचार पाठ्यक्रमों के जरिए पहुंचाया और लोगों को शिक्षित करने के साथ ही उसका अभ्यास भी कराया।

विज्ञापन
विज्ञापन
paramhansa yogananda jayanti importance of yoga and meditation

स्वामी जी ने कई तरह से व्यक्त किया कि योग का अर्थ ईश्वर से मिलना या जुड़ना है। उनकी शिक्षाएं मूलत: सिखाती हैं कि किस प्रकार हर कोई व्यक्ति इसे पा सकता है। उन्होंने आधुनिक युग के लोगों के सामने योग का वैज्ञानिक स्वरूप व्यक्त किया। क्रिया योग विज्ञान के रूप में ध्यान की एक ऐसी प्रविधि को रखा, जिसका जिक्र श्रीकृष्ण ने गीता में किया है। आधुनिक युग में योगानंद ने उसी का प्रचार किया और लोगों को सिखाया।

विज्ञापन
paramhansa yogananda jayanti importance of yoga and meditation

अपनी आत्मकथा'योगी कथामृत ' में शरीर, मन व आत्मा के सुसंगत विकास के लिए उन्होंने क्रिया योग प्रविधि की मुख्य विशेषताओं का वर्णन किया है। मनमोहक शैली में लिखी गई इस पुस्तक में ऐसे वैश्विक सत्य हैं,जो हर युग, हर राष्ट्र,हर पृष्ठभूमि से आए व्यक्ति के लिए उपयुक्त हैं। परमहंस योगानंद द्वारा बताई गई ध्यान की इन प्रविधियों का पूरी श्रद्धा और नियम से अभ्यास कर साधक उस आत्म साक्षात्कार के योग्य हो जाता है, जिसकी चर्चा संसार के सभी मुख्य धर्मों में की गई है। योगानंद जी ने शरीर , मन और आत्मा के संतुलित विकास पर बल दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुछ शारीरिक व्यायाम केवल योग नहीं हैं, अपितु इसका अंतिम लक्ष्य है - ईश्वर के साथ मिलना। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed