Chanakya Niti: अच्छे और बुरे इंसान की परख करने में होती है परेशानी, तो इन बातों को हमेशा रखें ध्यान
मनुष्य का चरित्र: आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र से ही होती है, व्यक्ति का चरित्र उसके जीवन की सच्चाई को खोल कर रख देता है। आपके किसी करीबी का चरित्र ऐसा है जिसकी लोग तारीफ करते हैं तो इसका मतलब है वह आपके लिए सही है लेकिन अगर उसके आपके अगर किसी व्यक्ति का चरित्र ठीक नहीं है और आप उसकी संगति में है तो उसकी छवि आपको हानि पहुंच सकती है। इसलिए ऐसे लोगों से दूर रहना ही सही रहता है।
मनुष्यता का भाव: आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य के अंदर मानवता होनी बेहद आवश्यक है। यदि मनुष्य के अंदर मानवता है तो उसकी अंदर की मानवीय भावना सबके समक्ष प्रस्तुत हो जाएगी और उसकी अच्छाई को लोग पसंद करेंगे वहीं अगर मनुष्य के अंदर मानवता नाम की कोई चीज नहीं है तो इसका अर्थ है वह आपके लिए भी सही नहीं है। इस प्रकार के व्यक्ति हमेशा दूसरों का दुख देखकर प्रसन्न होते हैं।
मनुष्य की आदतें: चाणक्य का नीति शास्त्र कहता है कि जिन व्यक्तियों में आलस्य कूट कूट कर भरा होता है, जो बुरे व्यसन करते हैं या जो लोग झूठ बोलते हैं ऐसे लोगों से जितना दूर रहेंगे उतना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। क्योंकि इस प्रकार के लोग मुसीबत लाने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।
मनुष्य के कर्म: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि मनुष्य के कर्म उसकी अच्छाई या बुराई की परख करते हैं। यदि मनुष्य सदैव दूसरे मनुष्य की मदद करने के लिए तत्पर रहता है तो इसका अर्थ है कि वह अच्छे कर्मों में लिप्त है, वहीं यदि मनुष्य कुछ भी गलत कार्य करता है और धन कमाता और उससे लोगों की मदद करता है लेकिन फिर भी ऐसा व्यक्ति आपको नुकसान पहुंचाने में भी देरी नहीं करेगा। इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखें।