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Chanakya Niti : महामारी और युद्ध के समय रखेंगे इन बातों का ध्यान, तो आराम से गुजर जाएगा मुश्किल समय

Fri, 07 May 2021 10:07 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 07 May 2021 10:07 AM IST
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Chanakya niti for Epidemic and War Conditions
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

आचार्य चाणक्य कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। ये एक श्रेष्ठ विद्वान और एक योग्य शिक्षक थे। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा प्रदान करते हुए व्यतीत किया। इन्होंने विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी और वहीं पर आचार्य रहते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। ये राजनीति और कूटनीति में कुशल थे। आचार्य चाणक्य ने अपने ज्ञान और अनुभव को नीतिशास्त्र में पिरोया है। नीतिशास्त्र में माहमारी और युद्ध जैसे हालातों के लिए भी महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। यदि महामारी में अपने आचरण और व्यवहार के सही रखा जाए तो मुश्किल हालात का भी आसानी से सामना किया जा सकता है। जानते हैं कि क्या कहती है चाणक्य नीति।

Chanakya niti for Epidemic and War Conditions
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
महामारी की स्थिति होने पर

आचार्य चाणक्य के अनुसार महामारी जैसा संकट आने पर व्यक्ति को अपना आपा नहीं खोना चाहिए। उस समय परेशान होने की बजाए सतर्कता और सावधानी से काम लेना चाहिए और भावुक होने की जगह सूझ-बूझ के साथ निर्णय लेने चाहिए। अपने मन से नकारात्मक विचारों को दूर रखना चाहिए और सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए साथ ही दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए।'

Chanakya niti for Epidemic and War Conditions
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
युद्ध की स्थिति में

आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को युद्ध की स्थिति में अपनी हिम्मत और हौसला बनाए रखना चाहिए। सही मायनो में संकट के समय ही व्यक्ति की प्रतिभा की परख होती है। युद्ध की स्थिति में समस्या से भागने के बजाए उससे निकलने की युक्ति सोचनी चाहिए और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाना चाहिए।

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Chanakya Success Mantra - फोटो : social media
जब शत्रु हो अधिक शक्तिशाली

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि यदि आपका शत्रु अधिक शक्तिशाली है तो उस समय जोश दिखाने की जगह होश से काम लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में शत्रु को सामने से ललकारना आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। यदि उस समय वहां से पीछे हटना पड़े तो हट जाना चाहिए और सभी को एकत्रित करने के बाद योजनाबद्ध तरीके से शत्रु का सामना करना चाहिए।

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