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चाणक्य नीति में बताई गई है पिता, पुत्र, मित्र और जीवनसाथी की सही परिभाषा

Tue, 04 May 2021 11:56 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 04 May 2021 11:56 AM IST
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chanakya niti about father son or friendship and life partner relationship
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

आचार्य चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। इन्होंने ही चंद्रगुप्त को अपनी नीतियों के बल पर एक साधारण बालक से शासक के रूप में स्थापित किया। इन्हें कई विषयों की गहरी समझ थी। ये श्रेष्ठ विद्वान थे। अर्थशास्त्र के मर्मज्ञ होने के कारण इन्हें कौटिल्य कहा जाता था। आचार्य चाणक्य के द्वारा लिखे गए नीतिशास्त्र में जीवन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया गया है। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि पिता, पुत्र और जीवनसाथी के सही मायने में क्या कर्तव्य होते हैं। जानते हैं कि इस बारे में क्या कहती है चाणक्य नीति।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

पुत्र वही जो पिता का भक्त
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि 'वही पुत्र है, जो पिता का भक्त है' कहने का तात्पर्य यह है कि पुत्र को सदैव अपने पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए। कभी उनकी आज्ञा की अवमानना नहीं करनी चाहिए। सही मायने में वही पुत्र है जो अपने पिता की आज्ञा मानता हो और सदैव उनकी बातों का अनुसरण करे।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

पिता वही जो पालन करे
एक पिता का कर्तव्य होता है कि वह अपनी संतान का सही प्रकार से भरण पोषण करे और उनकी शिक्षा, भरण पोषण एवं आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखे। एक पिता अपनी संतान का आदर्श होता है इसलिए पिता को अपने सभी कर्तव्य भलि प्रकार से पूर्ण करने चाहिए।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

जीवन साथी वही जो सुख प्रदान करे
यहां पर सुख का मायने केवल शारीरिक सुख से नहीं है अपितु सही मायने में जीवन साथी वही है जो अपने साथी को प्रसन्न रख सके। कहने का तात्पर्य यह है कि जो हर परिस्थिति में साथ निभाए। सही मायने में जीवन साथी वही  होता है जो अच्छे और बुरे दोनों समय में साथ खड़ा रहे और दुख की घड़ी में भी अपने साथी को सही मायनों में सुख प्रदान करे।

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Chanakya Mantra - फोटो : social media

मित्र वही जिस पर विश्वास किया जा सके
किसी भी व्यक्ति के जीवन में मित्र वह इंसान होता है जिससे वह अपने सुख और दुख दोनों साझा करता है। मित्र को ही व्यक्ति के बारे में अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातें पता होती हैं, इसलिए चाणक्य कहते हैं कि सही मायने में मित्र वही है जिस पर विश्वास किया जा सके।

 

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