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Yashoda jayanti 2021: माताओं के लिए बेहद खास होता है ये दिन, जानें महत्व, तिथि और पूजा विधि

Thu, 25 Feb 2021 12:51 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 25 Feb 2021 12:51 PM IST
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Yashoda jayanti 2021 date significance and vrat puja vidhi
यशोदा जयंती 2021

हिंदी कैलेंडर के हिसाब से फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। इस बार यशोदा जयंती 4 मार्च 2021 दिन बृहस्पतिवार को पड़ रही है। इस दिन को पूरी दुनिया के इस्कॉन मंदिरों और कृष्ण जी के सभी मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्री कृष्ण की मैया यशोदा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान के मंगल-कुशल के लिए व्रत करती हैं। यह त्योहार गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों में बहुत ही उल्लास के साथ मनाते हैं। जानते हैं यशोदा जयंती का महत्व मुहूर्त और पूजा विधि...

Yashoda jayanti 2021 date significance and vrat puja vidhi
यशोदा जयंती 2021
यशोदा जयंती का महत्व

माता यशोदा की वात्सल्य मिसालें आज भी दी जाती हैं। यह दिन माता और संतान के प्रेम को दर्शाता है। यह दिन माताओं के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और उन्नति की कामना के लिए करती हैं। मान्यता अनुसार इस दिन माता यशोदा और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा और व्रत करने से संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।

Yashoda jayanti 2021 date significance and vrat puja vidhi
यशोदा जयंती 2021
यशोदा जयंती की तिथि शुभ मुहूर्त


यशोदा जयंती 4 मार्च दिन बृहस्पतिवार


फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि आरंभ- 04 मार्च 2021 दिन बृहस्पतिवार को रात 12 बजकर 21 मिनट से


फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि समाप्त- 05 मार्च 2021 दिन शुक्रवार को रात 09 बजकर 58 मिनट पर

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Yashoda jayanti 2021 date significance and vrat puja vidhi
यशोदा जयंती 2021
यशोदा जयंती पूजा विधि


यशोदा जयंती को प्रातः काल स्नान आदि करने के बाद माता यशोदा का ध्यान करें। 


पूजन के लिए माता यशोदा की भगवान कृष्ण की गोद में लिए हुए तस्वीर को स्थापित करें।


यदि माता यशोदा की तस्वीर न हो तो उनका ध्यान करते हुए भगवान श्री कृष्ण के समक्ष दीपक प्रज्वलित कराएं

मां यशोदा जी को लाल चुनरी अर्पित करें।

 

माता यशोदा को मिष्ठान और भगवान कृष्ण को मक्खन का भोग लगाएं।


इसके बाद माता यशोदा और भगवान कृष्ण की आरती करें। तत्पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करें।

 

पूजा संपन्न होने के बाद अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।

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