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Shani Jayanti 2020: क्यों है शनि की धीमी चाल, राशि परिवर्तन में लेता है ढाई वर्ष का समय

Mon, 11 May 2020 07:40 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 11 May 2020 07:40 AM IST
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Why shani has a slow movement know its religious significance
शनि जयंती 2020

Shani Jayanti 2020: इस साल शनि जयंती 22 मई को मनाई जाएगी। शनि जयंती प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। शनि देव सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं। हिन्दू धर्म एवं ज्योतिष शास्त्र में शनि देव का महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक दृष्टि से जहां शनिवार के दिन शनि मंदिर में उनकी आराधना होती है। वहीं ज्योतिष में शनि एक ग्रह के रूप में भी स्थापित हैं। सभी ग्रह अपनी राशि बदलते हैं। इन ग्रहों में शनि की चाल सबसे धीमी है। यह एक राशि से दूसरी राशि में पहुंचने में ढाई वर्ष का समय लेता है। पौराणिक शास्त्रों में शनि की धीमी चाल का कारण एक कथा से जुड़ा है। ये कथा रावण और शनि देव से संबंधित है। जो इस प्रकार है - 

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'रावण' - फोटो : ट्विटर
शनि की धीमी चाल से जुड़ी पौराणिक कथा

रावण ज्योतिष विद्या का प्रकाण्ड विद्वान था। कहते हैं एक बार उसने अपने ज्योतिष ज्ञान के बल से सभी ग्रहों को अपने एक स्थिति में रहने के लिए बाध्य कर दिया था। इस दौरान जब सभी ग्रह रावण के भय से त्रस्त थे। उसी समय कर्मफलदाता शनि ने रावण के खिलाफ विद्रोह कर रहा था। 

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ग्रह - फोटो : Pixabay

अजेय पुत्र प्राप्ति के लिए रावण ने की सभी ग्रहों को साधने की कोशिश
रावण की पत्नी मंदोदरी जब मेघनाथ को जन्म देने वाली थी। तब रावण ने नवग्रहों को एक निश्चित स्थिति में रहने के लिए बाध्य कर दिया था जिससे उत्पन्न होने वाला पुत्र अत्यंत तेजस्वी, शौर्य, पराक्रम से युक्त होता। रावण ने सभी ग्रहों का ऐसा समय साध लिया था जिस समय में अगर किसी बालक का जन्म हो तो वह अजेय एवं दीर्घायु का होता।

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शनि ग्रह - फोटो : Pixabay

शनि के विद्रोह से मेघनाथ हुआ अल्पायु
लेकिन जब मेघनाद का जन्म हुआ तो बाकि सभी ग्रहों ने रावण के भय से उसकी आज्ञा का पालन किया लेकिन ठीक उसी समय शनि ग्रह ने अपनी स्थिति में परिवर्तन कर लिया। अब जिस स्थिति में शनि के होने की वजह से रावण का पुत्र दीर्घायु होता, तो वही पुत्र अब अल्पायु हो गया। रावण इससे अत्यंत क्रोधित हो गया।

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रावण

क्रोध में आकर रावण ने तोड़ी शनि की टांग 
भयंकर क्रोध में रावण ने शनि के ऊपर गदा का प्रहार किया जिससे शनि के एक पैर में चोट लग गयी और वो पैर से लाचार हो गए अर्थात लंगड़े हो गए। इन सब वजहों से रावण-पुत्र मेघनाद, प्रचंड पराक्रमी, तेजस्वी और शौर्यवान तो था लेकिन वह अल्पायु था जो रामायण के युद्ध में लक्ष्मण के द्वारा मारा गया था।

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