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शास्त्रों में ग्रहण के समय मैथुन और भोजन की इसलिए मनाही है

Sun, 27 Sep 2015 10:57 AM IST
Updated Sun, 27 Sep 2015 10:57 AM IST
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शास्त्रों में ग्रहण के समय मैथुन और भोजन की इसलिए मनाही है

why food and sex is inauspicious during eclipse

शास्त्रों पुराणों में ग्रहण को बड़ा ही महत्व दिया गया है और कहा गया है कि इस समय व्यक्ति को न तो मल-मूल करना चाहिए और न भोजन एवं मैथुन। आखिर इसके पीछे क्या कारण है और ऐसा करने से क्या होता है आइये देखें।

शास्त्रों में ग्रहण के समय मैथुन और भोजन की इसलिए मनाही है

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स्कन्द पुराण के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। देवी भागवत के अनुसार सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर गुल्मरोगी, काना और दंतहीन होता है।

शास्त्रों में ग्रहण के समय मैथुन और भोजन की इसलिए मनाही है

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ग्रहण के समय सोने से व्यक्ति रोगी होता है। इसलिए ग्रहण के समय भगवान का ध्यान करते हुए जागरण करना चाहिए।

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शास्त्रों में ग्रहण के समय मैथुन और भोजन की इसलिए मनाही है

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शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के समय मल-मूत्र त्यागने से घर में दरिद्रता आती है। इसलिए ग्रहण के समय मल मूत्र के त्याग से बचना चाहिए। इसलिए ग्रहण से पहले ऐसा भोजन नहीं करें कि ग्रहण के दौरान मल मूल करना पड़े।

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शास्त्रों में ग्रहण के समय मैथुन और भोजन की इसलिए मनाही है

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शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के समय मैथुन करने से व्यक्ति अगले जन्म में सूअर की योनि में जन्म लेता है।
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