हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सभी देवों में प्रथम पूजनीय माना गया है। हर शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की आराधना अवश्य की जाती है। इनकी पूजा के साथ शुरु किए गए कार्य बिना किसी विघ्न बाधा के पूर्ण हो जाते हैं। प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के रुप में मनाया जाता है। इस बार विनायक चतुर्थी का व्रत 14 जून दिन सोमवार को मनाई जाएगी। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित की जाती है। इस दिन व्रत करने से घर में शुभता का वास होता है। भगवान गणेश अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान गणेश का व्रत और पूजन करना चाहिए। तो आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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vinayak chaturthi 2021: 14 तारीख को है विनायक चतुर्थी, जानिए महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Tue, 08 Jun 2021 03:14 PM IST
Shashi Shashi
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Tue, 08 Jun 2021 03:14 PM IST
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विनायक चतुर्थी 2021 ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
विनायक चतुर्थी 2021 ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
विनायक चतुर्थी तिथि का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के निमित्त व्रत किया जाए तो भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं। कार्यों में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है। भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
विनायक चतुर्थी 2021 ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त-
ज्येष्ण माह शुक्ल पक्ष चतुर्थी आरंभ- 13 जून 2021 दिन रविवार रात 9 बजकर 40 मिनट से
ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष चतुर्थी समाप्त- 14 जून 2021 दिन सोमवार रात 10 बजकर 34 मिनट पर
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- फोटो : social media
विनायक चतुर्थी की व्रत विधि
- चतुर्थी तिथि को प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें, गंगाजल छिड़कें और व्रत का संकल्प लें।
- चाहे तो घर के मंदिर में ही पूजन आरंभ करें या फिर लकड़ी की पटरी पर लाल रंग का आसन बिछाकर भगवान गणेश के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- दीपक प्रज्वलित करने के बाद सिंदूर से भगवान गणेश का तिलक करें और उन्हें दूर्वा, फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें।
- पूजा के बाद गणेश जी की आरती करें।