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vat purnima 2021: इस दिन है वट पूर्णिमा, जानें महत्व तिथि, पूजा विधि और पूजा सामाग्री की पूरी लिस्ट

Tue, 22 Jun 2021 05:23 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 22 Jun 2021 05:23 PM IST
सार

उत्तर भारत के कई स्थानों जैसे  पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को किया जाता है तो वहीं महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी भारतीय राज्यों यह व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को किया जाता है।

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Vat savitri purnima 2021 date timing and konw the importance puja samagri list and puja vidhi of vat sabitri vrat
वट सावित्री व्रत - फोटो : amar ujala

प्रत्येक वर्ष दो बार वट सावित्री का व्रत किया जाता है। एक बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को यह व्रत किया जाता है तो वहीं कई स्थानों पर इसके पंद्रह दिनों के बाद ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को भी वट सावित्री का व्रत किया जाता है। उत्तर भारत के कई स्थानों जैसे  पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को किया जाता है तो वहीं महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिणी भारतीय राज्यों यह व्रत ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को किया जाता है। इस बार अमावस्या का व्रत किया जा चुका है और पूर्णिमा तिथि का वट सावित्री व्रत 24 जून 2021 दिन बृहस्पतिवार को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार वट के वृक्ष के नीचे ही सावित्री के पति सत्यवान को जीवनदान मिला था, इसलिए इस व्रत में वट के वृक्ष का पूजन किया जाता है और उसमें सूत बांधा जाता है। तो आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूजा में लगने वाली सामाग्री।

Vat savitri purnima 2021 date timing and konw the importance puja samagri list and puja vidhi of vat sabitri vrat
vat savitri vrat

वट सावित्री व्रत का मुहूर्त
वट सावित्री का व्रत 24 जून के रखा जाएगा।
ज्येष्ठ मास पूर्णिमा तिथि आरंभ- 24 जून 2021 दिन गरुवार तड़के 03 बजकर 32 मिनट से
ज्येष्ठ मास पूर्णिमा तिथि समाप्त- 25 जून 2021 दिन शुक्रवार अर्ध्य रात्रि 12 बजकर 09 मिनट पर

Vat savitri purnima 2021 date timing and konw the importance puja samagri list and puja vidhi of vat sabitri vrat
काली वाणी मंदिर में वट वृक्ष की पूजा करतीं महिलाएं। - फोटो : mahesh kumar

वट सावित्री व्रत का महत्व
धार्मिक पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री अपने पति के प्राण यमराज से बचाए थे और उनसे पुत्र प्राप्ति एवं अपने सास-ससुर का राज-काज वापस मिलने का वरदान भी प्राप्त किया था। इसलिए यह व्रत स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और संतान प्राप्ति के लिए करती हैं। इसके साथ ही मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि भी प्राप्त होती है।

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वट सावित्री व्रत - फोटो : amar ujala

वट सावित्री व्रत के लिए महत्वपूर्ण पूजन सामाग्री
वट वृक्ष में बांधने के लिए पीला कलावा या सूत, कुमकुम या रोली, बांस का पंखा, दीपक घी-बाती, सुगंधित धूप, भिगोए हुए चने, गुलगुले, पूरियां, फल-फूल, बरगद का फल, जल भरा हुआ कलश, पूजा के लिए सिंदूर और श्रंगार का सामान। आगे जानें पूजन विधि

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वट सावित्री व्रत - फोटो : amar ujala

वट सावित्री पूजा विधि-

  • इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें और श्रंगार करके तैयार हो जाएं। 
  • सभी पूजन सामाग्री को एक स्थान पर एकत्रित कर लें और थाली सजा लें।
  • किसी वट वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें।
  • अब बरगद के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और पुष्प, अक्षत, फूल, भीगा चना, गुड़ व मिठाई अर्पित करें।
  • अब वट के वृक्ष पर सूत लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें और अंत में प्रणाम करके परिक्रमा पूर्ण करें।
  • अब हाथ में चने लेकर वट सावित्री की कथा पढ़ें या सुनें।
  • पूजन के बाद ब्राह्मणों को फल और वस्त्रों का दान दें।
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