कमलेश कमल
Namaz Word Origin in Hindi: वर्तमान समय में भाषाओं, धार्मिक परंपराओं और व्युत्पत्तियों को लेकर अनेक भ्रांत धारणाएं सोशल मीडिया और लोकवृत्त में प्रचारित हो रही हैं। ऐसी ही एक धारणा यह भी है कि "नमाज" शब्द संस्कृत के "नमः" और "अज" शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ बताया गया है — "अजन्मा को नमस्कार करना"। यह आलेख इस दावे की भाषावैज्ञानिक समीक्षा करता है।
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"नमाज" (نماز) शब्द फारसी भाषा का है, जिसका अर्थ होता है—"प्रार्थना", "उपासना" या "वंदना"। यह शब्द इस्लामी परंपरा के साथ भारत में आया और मुख्यतः उर्दू और हिंदी में प्रचलित हुआ।
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"नमाज" शब्द की वास्तविक उत्पत्ति
"नमाज" (نماز) शब्द फारसी भाषा का है, जिसका अर्थ होता है—"प्रार्थना", "उपासना" या "वंदना"। यह शब्द इस्लामी परंपरा के साथ भारत में आया और मुख्यतः उर्दू और हिंदी में प्रचलित हुआ। फारसी में यह शब्द अवेस्ताई मूल के "नम" से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है- "झुकना", "नमन करना", "वंदना करना"। अवेस्ताई मूल की इस चर्चा के साथ यह भी जोड़ना समीचीन होगा कि नम फारसी का एक पुंल्लिंग शब्द भी है, जिसका अर्थ गीला, तर आदि है। नमाज में यह नम नहीं है।
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इस्लाम में अनिवार्य प्रार्थना को अरबी में "सलात" (صلاة) कहा जाता है। सलात एक धार्मिक कर्तव्य है, जबकि "नमाज" शब्द उसका फारसी अनुवाद या समानार्थक बनकर उभरा।
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अरबी में इसका पर्याय
इस्लाम में अनिवार्य प्रार्थना को अरबी में "सलात" (صلاة) कहा जाता है। सलात एक धार्मिक कर्तव्य है, जबकि "नमाज" शब्द उसका फारसी अनुवाद या समानार्थक बनकर उभरा। कुरआन और हदीस में प्रयुक्त मूल शब्द सलात ही है, नमाज़ नहीं।
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कुछ दावों में कहा गया है कि: "नमः" = प्रणाम, नमस्कार "अज" = अजन्मा, ईश्वर, शिव और "नमाज" = अजन्मा को नमन करना परंतु यह भाषावैज्ञानिक रूप से त्रुटिपूर्ण निष्कर्ष है:
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संस्कृत से निष्पत्ति का दावा: एक भ्रांति
कुछ दावों में कहा गया है कि: "नमः" = प्रणाम, नमस्कार "अज" = अजन्मा, ईश्वर, शिव और "नमाज" = अजन्मा को नमन करना परंतु यह भाषावैज्ञानिक रूप से त्रुटिपूर्ण निष्कर्ष है: संस्कृत में "नमः + अज" से "नमाज़" जैसे स्वरूप का निर्माण व्याकरणिक दृष्टि से संभव नहीं। परमात्मा के आगे झुकने के लिए "नमः + अज" से यदि कोई शब्द बनता, तो वह "नमोज" या "नमोजय’’ जैसा होता — "नमाज़" नहीं। ध्यातव्य है कि “ज़” जैसी ध्वनि संस्कृत में नहीं होती; यह अरबी-फ़ारसी प्रभाव से हिंदी-उर्दू में आई है।
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यह भाषा विज्ञान का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि ध्वनि-साम्य और शब्द-संरचना दोनों अलग चीजें हैं।
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ध्वन्यात्मक साम्यता ≠ व्युत्पत्ति
यह भाषा विज्ञान का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि ध्वनि-साम्य और शब्द-संरचना दोनों अलग चीजें हैं। जैसे “माता” (संस्कृत), “मादर” (फारसी), “मदर” (अंग्रेज़ी), “मैरे” (फ्रेंच) — इन सबमें साम्य है, लेकिन इनकी व्युत्पत्ति एक नहीं। इसी तरह "नमाज़" और "नमः" में ध्वन्यात्मक साम्य हो सकता है, पर व्याकरणिक व्युत्पत्ति नहीं।