History of Kashmir: कश्मीर की धरती को सदियों से बेहद पावन और पवित्र माना गया है। पौराणिक कथाओं में कश्मीर को भगवान शिव और सती का क्रीड़ाक्षेत्र बताया गया है। साथ ही कश्मीर महर्षि कश्यप की भूमि भी कहा जाता है। इसे जमीन की जन्नत भी कहा जाता है। कश्मीर का नाम आते ही एक विश्व प्रसिद्ध उक्ति, 'धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं' याद आ जाती है। लेकिन जिस कश्मीर की धरती को इतना पावन माना गया है, आजकल वो काफी चर्चा में है। इसकी वजह है विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स'। इस फिल्म में कश्मीरी पंडितों के उस नरसंहार को दिखाया गया है, जो उन्होंने 1990 के दशक में झेला था। इस फिल्म की कहानी ने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। कुछ लोग इस फिल्म की काफी तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे विवादास्पद बता रहे हैं। जिस कश्मीर की धरती पर देवताओं का वास रहा हो वहां पर हिंदुओ के साथ हुए नरसंहार ने सबको झकझोर कर रख दिया है। इस फिल्म में महर्षि कश्यप का भी जिक्र किया गया है। 'द कश्मीर फाइल्स' का एक डायलॉग भी काफी चर्चा में है-
जिस Kashmir Files फिल्म में कश्यप ऋषि की चर्चा, जानिए कौन थे महर्षि कश्यप और कैसे कश्यप से बना कश्मीर ?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माना जाता है कि कश्यप ऋषि के नाम पर ही कश्मीर का प्राचीन नाम था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जलोद्भव नामक राक्षस ने ब्रह्मा के वरदान से आतंक फैला रखा था। इसके बाद देवताओं के आग्रह पर पक्षी रूप में भगवती ने चोंच में पत्थर रखकर राक्षस को मारा था। बाद में वह पत्थर हरी पर्वत हो गया और महर्षि कश्यप ने सर का जल निकालकर इस स्थान को बसाया था, जिसके बाद से ये स्थान कश्मीर के नाम से जाना जाने लगा।
पुराणों के अनुसार सृष्टि की रचना और विकास के काल में धरती पर सर्वप्रथम भगवान ब्रह्माजी प्रकट हुए। ब्रह्माजी से दक्ष प्रजापति का जन्म हुआ। ब्रह्माजी के निवेदन पर दक्ष प्रजापति ने अपनी पत्नी असिक्नी के गर्भ से 66 कन्याएं पैदा की। इन कन्याओं में से 13 कन्याएं- अदिति, दिति, दनु, काष्ठा, अरिष्टा, सुरसा, इला, मुनि, क्रोधवशा, ताम्रा, सुरभि, सुरसा, तिमि, विनता, कद्रू, पतांगी और यामिनी ऋषि कश्यप की पत्नियां बनीं।
इन्हीं कन्याओं से ही सृष्टि का सृजन हुआ और जिसके परिणामस्वरूप महर्षि कश्यप जी ‘सृष्टि के सृजक’ कहलाए। ऋषि कश्यप सप्तऋषियों में प्रमुख माने जाते हैं। पुराणों अनुसार देवताओं और दैत्यों के पिता कश्यप ऋषि ही थे। इसके अलावा कश्यप ने बहुत से स्मृति-ग्रंथों की रचना की थी।
पुराणों अनुसार कश्यप ने अपनी पत्नी अदिति के गर्भ से बारह आदित्यों को जन्म दिया, जिनमें भगवान नारायण का वामन अवतार भी शामिल था। वहीं कश्यप ऋषि ने दिति के गर्भ से हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष नामक दो पुत्र एवं सिंहिका नामक एक पुत्री को जन्म दिया। श्रीमद्भागवत् के अनुसार इन तीन संतानों के अलावा दिति के गर्भ से कश्यप के 49 अन्य पुत्रों का जन्म भी हुआ, जो कि मरुन्दण कहलाए।
इसके अलावा ऋषि कश्यप को उनकी पत्नी दनु के गर्भ से 61 महान पुत्रों की प्राप्ति हुई। वहीं अन्य पत्नीयों- रानी काष्ठा से घोड़े आदि एक खुर वाले पशु उत्पन्न हुए। पत्नी अरिष्टा से गंधर्व पैदा हुए। सुरसा नामक रानी से राक्षस उत्पन्न हुए। इला से वृक्ष, लता आदि पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाली वनस्पतियों का जन्म हुआ। वहीं मुनि के गर्भ से अप्सराएँ जन्मीं। कश्यप की क्रोधवशा नामक रानी ने सांप, बिच्छु आदि विषैले जन्तु पैदा किए।
ताम्रा ने बाज, गिद्ध आदि शिकारी पक्षियों को अपनी संतान के रूप में जन्म दिया। इसके अलावा सुरभि ने भैंस, गाय तथा दो खुर वाले पशुओं की उत्पत्ति की। रानी सरसा ने बाघ आदि हिंसक जीवों को पैदा किया। तिमि ने जलचर जन्तुओं को अपनी संतान के रूप में उत्पन्न किया और रानी विनता के गर्भ से गरुड़ और वरुण पैदा हुए। कद्रू की कोख से बहुत से नागों की उत्पत्ति हुई। वहीं रानी पतंगी से पक्षियों का जन्म हुआ। यामिनी के गर्भ से शलभों का जन्म हुआ। ब्रह्माजी की आज्ञा से प्रजापति कश्यप ने वैश्वानर की दो पुत्रियों पुलोमा और कालका के साथ भी विवाह किया। उनसे पौलोम और कालकेय नाम के साठ हजार रणवीर दानवों का जन्म हुआ जो कि कालान्तर में निवातकवच के नाम से विख्यात हुए। मान्यता है कि इसी तरह सृष्टि की रचना हुई और महर्षि कश्यप सृष्टि के सृजक कहलाए।