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Surya Dev Chalisa: रविवार के दिन करें सूर्य चालीसा का पाठ, धन के साथ प्रतिष्ठा में होती है वृद्धि

Sun, 24 Apr 2022 07:08 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sun, 24 Apr 2022 07:08 AM IST
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surya dev chalisa lyrics in hindi for happines and money in life
हर रविवार के दिन करें सूर्य चालीसा का पाठ - फोटो : iStock

Surya Dev Chalisa: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है। कहा जाता है कि सूर्य की उपासना करने से मानसिक और शारीरिक सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सूर्य देव की कृपा से जातक को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। ऐसे में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार के दिन सूर्य चालीसा का पाठ जरूर करें। सूर्य चालीसा का पाठ करने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं सूर्य चालीसा लिरिक्स, जिसके जरिए आप इसका पाठ कर सकते हैं.... 

॥ दोहा ॥

कनक बदन कुण्डल मकर,मुक्ता माला अङ्ग।
पद्मासन स्थित ध्याइए,शंख चक्र के सङ्ग॥

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हर रविवार के दिन करें सूर्य चालीसा का पाठ - फोटो : iStock


॥ चौपाई ॥

जय सविता जय जयति दिवाकर!।सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!।सविता हंस! सुनूर विभाकर॥

विवस्वान! आदित्य! विकर्तन।मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते।वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥

सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि।मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
अरुण सदृश सारथी मनोहर।हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥

मंडल की महिमा अति न्यारी।तेज रूप केरी बलिहारी॥
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते।देखि पुरन्दर लज्जित होते॥

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हर रविवार के दिन करें सूर्य चालीसा का पाठ - फोटो : iStock

मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर।सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
पूषा रवि आदित्य नाम लै।हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं।मस्तक बारह बार नवावैं॥
चार पदारथ जन सो पावै।दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥

नमस्कार को चमत्कार यह।विधि हरिहर को कृपासार यह॥
सेवै भानु तुमहिं मन लाई।अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥

बारह नाम उच्चारन करते।सहस जनम के पातक टरते॥
उपाख्यान जो करते तवजन।रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥

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हर रविवार के दिन करें सूर्य चालीसा का पाठ - फोटो : iStock

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है।प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
अर्क शीश को रक्षा करते।रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत।कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
भानु नासिका वासकरहुनित।भास्कर करत सदा मुखको हित॥

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे।रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा।तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर।त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
युगल हाथ पर रक्षा कारन।भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥

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हर रविवार के दिन करें सूर्य चालीसा का पाठ - फोटो : iStock

बसत नाभि आदित्य मनोहर।कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
जंघा गोपति सविता बासा।गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥

विवस्वान पद की रखवारी।बाहर बसते नित तम हारी॥
सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै।रक्षा कवच विचित्र विचारे॥

अस जोजन अपने मन माहीं।भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै।जोजन याको मन मंह जापै॥

अंधकार जग का जो हरता।नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही।कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥

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