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Shri Krishna Janmashtami 2022: जानिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सही पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व

Fri, 19 Aug 2022 11:08 AM IST
आशिकी पटेल कु. कृतिका खत्री, सनातन संस्था, दिल्ली
कु. कृतिका खत्री, सनातन संस्था, दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Fri, 19 Aug 2022 11:08 AM IST
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Krishna Janmashtami 2022 Shree Krishna Puja Vidhi Niyam Mantra And Importance In Hindi
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सही पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व - फोटो : सनातन संस्था

Shri Krishna Janmashtami 2022: पूर्णावतार भगवान श्री कृष्ण ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पृथ्वी पर जन्म लिया था। उन्होंने बाल्यकाल से ही अपने असाधारण क्रियाकलापों के द्वारा भक्तों के संकट दूर किए। हर वर्ष भारत में मंदिरों, धार्मिक संस्थानों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है। यह उत्सव प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग पद्धति से मनाया जाता है। इस उत्सव के निमित्त बहुत संख्या में लोग एकत्र होकर भक्ति भाव से यह उत्सव मनाते हैं। इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी 18, 19 अगस्त को मनाई जा रही है। इस लेख में हम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व जानने वाले हैं-



महत्व 
जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण तत्व प्रतिदिन की अपेक्षा एक सहस्र गुना अधिक कार्यरत रहता है। इस तिथि को 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' यह नाम जप और श्रीकृष्ण की अन्य उपासना भावपूर्ण करने से श्रीकृष्ण तत्व का अधिक लाभ मिलने में सहायता होती है। मासिक धर्म, अशौच और स्पर्श-अस्पर्श इन सभी का स्त्रियों पर जो परिणाम होता है वह इस दिन उपवास करने से और ऋषि पंचमी का व्रत करने से उसका परिणाम कम होता है। (पुरुषों पर होने वाला परिणाम क्षौरादी प्रायश्चित कर्म से, और वास्तु पर होने वाला परिणाम उदक शांति से कम होता है)

Krishna Janmashtami 2022 Shree Krishna Puja Vidhi Niyam Mantra And Importance In Hindi
जानिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सही पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व - फोटो : Istock

उत्सव मनाने की पद्धति
इस दिन पूर्ण दिवस व्रत करके रात को 12:00 बजे बाल कृष्ण का जन्म मनाया जाता है। उसके पश्चात प्रसाद लेकर उपवास पूर्ण करते हैं या दूसरे दिन सुबह दही काला का प्रसाद लेकर उपवास पूर्ण करते हैं। 

श्री कृष्ण के पूजन का समय
श्री कृष्ण के जन्म का समय रात को 12:00 बजे होता है। इस कारण इसके पूर्व पूजन की तैयारी करके रखनी चाहिए। रात को 12:00 बजे यदि संभव हो तो श्री कृष्ण जन्म का पालना गीत लगाना चाहिए।

Krishna Janmashtami 2022 Shree Krishna Puja Vidhi Niyam Mantra And Importance In Hindi
जानिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सही पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व - फोटो : अमर उजाला

श्री कृष्ण का पूजन विधि - श्री कृष्ण जन्म का पालना भजन होने के पश्चात श्री कृष्ण की मूर्ति अथवा चित्र की पूजा करनी चाहिए। 

षोडशोपचार पूजन : जिनको श्रीकृष्ण जी की षोडशोपचार पूजा करना संभव हो उन्होंने उस प्रकार पूजा करनी चाहिए। 

पंचोपचार पूजन : जिनको श्री कृष्ण की षोडशोपचार पूजा करना संभव ना हो उनको 'पंचोपचार पूजा 'करनी चाहिए।  पूजन करते समय 'सपरिवाराय श्री कृष्णाय नमः' यह नाम मंत्र कहते हुए एक-एक सामग्री श्री कृष्ण को अर्पण करना चाहिए। श्री कृष्ण जी को दही ,पोहा और मक्खन का भोग लगाना चाहिए। उसके पश्चात श्री कृष्ण जी की आरती करनी चाहिए। (पंचोपचार पूजा : गंध, हल्दी -कुमकुम, फूल, धूप-दीप और भोग इस क्रम से पूजा करनी चाहिए) 

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Krishna Janmashtami 2022 Shree Krishna Puja Vidhi Niyam Mantra And Importance In Hindi
जानिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सही पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व - फोटो : amar ujala

श्री कृष्ण की पूजा कैसे करें ?  
भगवान श्री कृष्ण की पूजा के पूर्व उपासक ने स्वयं को मध्यमा से दो खड़ी लाइन में गंध लगाना चाहिए। श्री कृष्ण की पूजा में उनकी प्रतिमा को गोपी चंदन का गंध प्रयोग में लाया जाता है। श्री कृष्ण की पूजा करते समय अनामिका से गंध लगाना चाहिए। श्री कृष्ण जी को हल्दी कुमकुम चढ़ाते समय पहले हल्दी और फिर कुमकुम दाहिने हाथ के अंगूठे और अनामिका मैं लेकर उनके चरणों में अर्पण करना चाहिए। अंगूठा और अनामिका जोड़कर जो मुद्रा तैयार होती है,उससे पूजक का अनाहत चक्र जागृत होता है। उस कारण भक्ति भाव निर्माण होने में सहायता होती है। 

श्री कृष्ण जी को तुलसी क्यों चढ़ाते हैं ?  
जिस चीज में विशिष्ट देवताओं के पवित्रक (देवताओं के सुक्ष्म से सुक्ष्म कण) को आकर्षित करने की क्षमता अन्य वस्तुओं की अपेक्षा अधिक होती है वह वस्तु देवताओं को अर्पित की जाती है। इस कारण देवता की मूर्ति में वह तत्व अधिक प्रभाव में आकर आकर्षित होता है और इस कारण देवता की चैतन्यता का लाभ जल्दी होता है। तुलसी में कृष्ण तत्व प्रचुर मात्रा में होता है। काली तुलसी श्री कृष्ण के मारक तत्व और हरी पत्तों वाली तुलसी श्री कृष्ण के तारक तत्व का प्रतीक होती है। इसी कारण श्री कृष्ण जी को तुलसी अर्पित की जाती है। 

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Krishna Janmashtami 2022 Shree Krishna Puja Vidhi Niyam Mantra And Importance In Hindi
जानिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सही पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

श्री कृष्ण जी को कौन से फूल चढ़ाने चाहिए ? 
कृष्ण कमल के फूल में श्री कृष्ण को आकर्षित करने की क्षमता सबसे अधिक होने के कारण यह फूल श्री कृष्ण जी को चढ़ाना चाहिए। देवताओं के चरणों में फूल विशिष्ट संख्या में और विशिष्ट आकार में चढ़ाने से फूलों की ओर देवताओं का तत्व जल्दी आकर्षित होता है। उस अनुसार श्री कृष्ण को फूल चढ़ाते समय तीन या तीन तीन गुणा लंबा गोलाकार आकार में चढ़ाने चाहिए श्री कृष्ण जी को चंदन का इत्र लगाना चाहिए। श्री कृष्ण जी की पूजा करते समय उनका तारक तत्व ज्यादा अधिक प्रमाण में आकर्षित करने के लिए चंदन, केवड़ा, चंपा, चमेली, जाई, खस और अंबर इनमें से किसी भी प्रकार की उदबती प्रयोग में लानी चाहिए और श्रीकृष्ण के मारक तत्व को अधिक प्रमाण में आकृष्ट करने के लिए हिना या दरबार इस सुगंध वाली अगरबत्ती प्रयोग में लानी  चाहिए। 

श्री कृष्ण की मानस पूजा 
यदि कोई किसी कारणवश श्रीकृष्ण की प्रत्यक्ष पूजा नहीं कर सकता है तो उन्होंने । श्रीकृष्ण की मानस पूजा करनी चाहिए। (मानस पूजा अर्थात प्रत्यक्ष पूजा करना संभव न हो तो पूजन की सभी सामग्री मानस रूप से श्रीकृष्ण को अर्पित करनी चाहिए)

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