फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Shiva aur Nandi: आखिर क्यों सदैव भगवान शिव के साथ विराजते हैं नंदी? जानें इससे जुड़े रहस्य की कथा

Wed, 18 May 2022 12:25 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 18 May 2022 12:25 PM IST
विज्ञापन
Shiva aur Nandi Know Why Nandi Always Sit in front of Lord Shiva in any Shiv Temple
शिव के सामने क्यों विराजते हैं नंदी - फोटो : istock

Shiva aur Nandi: ज्ञानवापी मस्जिद शिवलिंग मामले को लेकर देशभर में चर्चा है। मस्जिद परिसर के सर्वे में शिवलिंग निकलने के दावे के बाद यह और गरम हो गई है। एक पक्ष इसे फव्वारा बता रहा है तो दूसरे का दावा है कि यह शिवलिंग ही है। हिंदु पक्ष के वकील ने दावा करते हुए कहा कि जो शिवलिंग 4 फीट व्यास का है, और 3 फुट ऊंचा है। उनके मुताबिक काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में स्थित नंदी भगवान के ठीक सामने 83 फीट की दूरी पर वजूखाने के बीचों-बीच शिवलिंग मिला है। जहां भी देवों के देव महादेव पूजे जाते हैं या उनका मंदिर होता है वहां नंदी का ज़िक्र आता ही है। शिव की मूर्ति के सामने या मंदिर के बाहर शिव के वाहन नंदी की मूर्ति सदैव स्थापित होती है। आइए जानते हैं भगवान शिव की प्रतिमा के सामने ही क्यों विराजित होते हैं नंदी क्या है इसके पीछे की कथा। 

Shiva aur Nandi Know Why Nandi Always Sit in front of Lord Shiva in any Shiv Temple
शिव के सामने क्यों विराजते हैं नंदी - फोटो : istock

पौराणिक कथा 
शिवपुराण की कथा के अनुसार, शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने चिंता व्यक्त की। मुनि योग और तप आदि में व्यस्त रहने के कारण वे गृहस्थ आश्रम में प्रवेश नहीं करना चाहते थे। शिलाद मुनि ने संतान की कामना के लिए इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए तप किया और उनसे ऐसे पुत्र का वरदान मांगा जो जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त हो। इंद्र देव ने इसमें अपनी असर्मथता जाहिर की लेकिन उन्हें भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सलाह दी। इंद्रदेव की आज्ञा के अनुसार  शिलाद मुनि ने भगवान शंकर की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने स्वयं शिलाद के पुत्र के रूप में प्रकट होने का वरदान दिया। 

Shiva aur Nandi Know Why Nandi Always Sit in front of Lord Shiva in any Shiv Temple
शिव के सामने क्यों विराजते हैं नंदी - फोटो : istock

शिलाद मुनि को हुई पुत्र की प्राप्ति 
भगवान शंकर के वरदान के कुछ समय पश्चात हल जोतते हुए धरती से एक बालक प्रकट हुआ। शिलाद मुनि ने उन्हें शिव का वरदान समझा और उसका नाम नंदी रखा। जैसे ही नंदी बड़े हुए भगवान शंकर ने मित्र और वरुण नाम के दो मुनि शिलाद मुनि के आश्रम में भेजे जिन्होंने नंदी के अल्पायु होने की भविष्यवाणी की। नंदी को जब यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने मृत्यु को जीतने के लिए भगवान भोलेनाथ के कठोर तपस्या करने की ठानी और वन में जाकर शिव का ध्यान किया। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Shiva aur Nandi Know Why Nandi Always Sit in front of Lord Shiva in any Shiv Temple
शिव के सामने क्यों विराजते हैं नंदी - फोटो : istock

शिव ने दिया नंदी को वरदान 
भगवान शंकर नंदी की तपस्या से प्रसन्न हुए और शंकर के वरदान से नंदी मृत्यु, भय आदि से मुक्त हुए। भगवान शंकर ने माता पार्वती की सम्मति से संपूर्ण गणों और वेदों के समक्ष गणों के अधिपति के रूप में नंदी का अभिषेक करवाया। इस तरह नंदी नंदीश्वर में बदल गए। कुछ समय पश्चात नंदी और मरुतों की पुत्री सुयशा का विवाह हुआ। 

विज्ञापन
Shiva aur Nandi Know Why Nandi Always Sit in front of Lord Shiva in any Shiv Temple
शिव के सामने क्यों विराजते हैं नंदी - फोटो : istock

मंदिर में अपने समक्ष बैठने का दिया वरदान 
भगवान शंकर ने नंदी को वरदान दिया कि जहां भी नंदी का निवास होगा, उसी स्थान पर शिव भी निवास करेंगे। यही कारण है कि हर शिव मंदिर में नंदी की स्थापना की जाती है। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed