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Navratri 2020: अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति, यह है सही जानकारी

Mon, 19 Oct 2020 02:23 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 19 Oct 2020 02:23 PM IST
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shardiya navratri puja  2020 Do not be confused about Ashtami and Navami Tithi this is correct and complete information
navratri 2020

इस समय नवरात्रि का पर्व आरंभ है। इस दौरान नौ दिनों तक मां के नौ स्वरुपों का पूजन किया जाएगा। नवरात्रि के प्रथम दिन से लेकर नवम दिन तक मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी मां, चंद्रघंटा माता, कूष्मांडा माता, स्कंध माता, कात्यायनी माता, कालरात्रि माता, सिद्धिदात्री माता का पूजन किया जाता है। अष्टमी को हवन और उसके बाद कन्यापूजन करके माता को विदा किया जाता है। हिंदू पंचांग के हिसाब से चंद्र तिथि के अनुसार पर्व मनाए जाते हैं। जिसके कारण कोई तिथि नौं तो कोई 12 घंटे की होती है जिसके कारण लोगों में कभी-कभी भ्रम की स्थिति बन जाती है। इस बार भी लोगों में अष्टमी, नवमी तिथि और दशमी तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जानते हैं क्या है सही जानकारी

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navratri 2020 अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि की जानकारी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पंचांग के अनुसार 23 अक्तूबर शुक्रवार सुबह 06:57 से अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी जो 24 अक्तूबर सुबह 6:58 तक रहेगी। उसके बाद नवमी तिथि 06:58 से आरंभ होकर 25 अक्तूबर सुबह 7:41 तक  रहेगी। तो वही 25 अक्तूबर को 7:41 से दशमी तिथि आरंभ होगी जो 26 अक्तूबर सुबह 9:00 बजे तक रहेगी। इस तरह से 25 अक्तूबर को ही दशमी तिथि लगने के कारण इसी दिन दशहरा मनाया जाएगा। इस तरह से आप तिथि के अनुसार हवन, कन्या पूजन और दशहरे का पर्व मना सकते हैं।  किस दिन  और कैसे करें कन्या पूजन...

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Wallpapers Navratri 2019 - फोटो : Amar Ujala

नवरात्रि की अष्टमी तिथि के दिन  हवन और उसके बाद नवमी तिथि को कन्या पूजन करने के बाद माता रानी को विदा करके व्रत का पारण किया जाता है। कुछ लोग हवन के बाद अष्टमी तिथि को ही कन्या पूजन करते हैं। लेकिन पारण समापन तिथि के बाद ही किया जाता है। अष्टमी तिथि को मां महागौरी और नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है।

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Navratri 2020

क्या है कन्या पूजन का महत्व
नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री के पूजन के साथ कन्या भोजन करवाने बहुत महत्व माना गया है। नवरात्रि में मां के नौं स्वरुप मानकर नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है। नवरात्रि में नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी बटुक भैरव या लांगुर का रुप मानकर पूजन किया जाता है। 2 से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन कराने का विशेष महत्व माना गया है।

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