फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Navratri 2022:  इस दिन से शुरू है नवरात्रि, जानिए माता के 9 स्वरूपों का महत्व, कथा समेत सम्पूर्ण जानकारी

Fri, 16 Sep 2022 06:05 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 16 Sep 2022 06:05 PM IST
विज्ञापन
Shardiya Navratri 2022 Know the nine form of Devi Durga importance pauranik katha mantra in hindi
Shardiya Navratri 2022: माता के 9 स्वरूपों का महत्व - फोटो : अमर उजाला

Shardiya Navratri 2022 : इस वर्ष 26 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू होकर 05 अक्टूबर तक चलेगी। नवरात्रि के इन नौ दिनों को धार्मिक दृष्टि से बेहद ही शुभ माना गया है। 9 दिनों तक मां दुर्गा के भक्त उपवास रखते हुए मां की आराधना,पूजा-पाठ और मंत्रों का जाप करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक शक्ति की विशेष पूजा करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है और दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। नवरात्रि के हर दिन एक देवी की पूजा,आराधना और मंत्र जाप का विधान होता है। आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ देवी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री की पूजा से शक्ति की प्राप्ति होती है,देवी के दूसरे स्वरूप ब्रह्राचारिणी की पूजा से मान-सम्मान, मां चंद्रघंटा की पूजा से एकाग्रता, देवी कूष्मांडा से मन में दया का भाव आता है,स्कंदमाता की आराधना से कामयाबी, मां कात्यानी की आराधना से बाधाएं दूर होती हैं, कालरात्रि की पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है,महागौरी की पूजा से सुख-समृद्धि और मां सिद्धिदात्री की पूजा करने पर जीवन की हर एक मनोकामना पूरी होती है। आइए जानते हैं माता के विभिन्न स्वरूपों के महत्व, पूजा विधि और मंत्रों समेत पूरी जानकारी। 

Shardiya Navratri 2022 Know the nine form of Devi Durga importance pauranik katha mantra in hindi
Shardiya Navratri 2022: माता के 9 स्वरूपों का महत्व - फोटो : amar ujala

पहला स्वरूप -माता शैलपुत्री
महत्व : नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश पूजा के साथ ही मां दुर्गा के पहले स्वरुप 'शैलपुत्री जी' का पूजन किया जाता है। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा का महत्व और शक्तियां अनंत हैं। मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरुप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।
पौराणिक कथा : माता शैलपुत्री को शिखर यानि हिमालय पर्वत की बेटी के रूप में जाना जाता है। इन्हें पार्वती और हेमवती के नाम से भी जाना जाता है।भागवत पुराण के अनुसार प्रजापति दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन कर सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा लेकिन भगवान शिव और पुत्री सती को नहीं बुलाया।  अपने पति भगवान शिव के अपमान से नाराज हो कर,उन्होंने यज्ञ का विध्वंस कर दिया। यज्ञ में अपनी आहूति देकर आत्मदाह कर लिया था। देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर में देवी पार्वती या माता शैलपुत्री के रूप में जन्म लिया। कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पुनः पति के रूप में प्राप्त किया।
पूजन मंत्र: वन्दे वांछितलाभाय, चंद्रार्धकृतशेखराम।
                 वृषारूढ़ां शूलधरां, शैलपुत्रीं यशस्विनीम।।

बीज मंत्र: ह्रीं शिवायै नम:।
पूजन विधि: नवरात्रि के प्रथम दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि कर सफेद वस्त्र धारण करें। इसके बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गंगा जल का छिड़काव करें और ऊपर केसर से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। अब चौकी पर मां शैलपुत्री या माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। माता को सफेद वस्त्र और सफेद फूल चढ़ाएं। साथ ही सफेद रंग की मिठाइयों का भोग लगाएं, माता के चरणों में गाय का घी अर्पित करें। तत्पश्चात मां शैलपुत्री के मंत्रों का 108 बार जाप करें और माता की आरती का पाठ करें।
माता का प्रिय रंग: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री को सफेद रंग पसंद है।

Shardiya Navratri 2022 Know the nine form of Devi Durga importance pauranik katha mantra in hindi
Shardiya Navratri 2022: माता के 9 स्वरूपों का महत्व - फोटो : amar ujala

दूसरा स्वरूप-  देवी ब्रह्मचारिणी
महत्व :मां दुर्गा की नवशक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्होंने हजारों वर्षों तक घोर तपस्या की थी। इनकी पूजा से अनंत फल की प्राप्ति एवं तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती है। इनकी उपासना से साधक को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा : पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने वर्षों तक कठिन तपस्या की और अंत में उनकी तपस्या सफल हुई। मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से सिद्धी की प्राप्ति होती है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि के लिए देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। 
पूजन मंत्र: दधाना करपाद्माभ्याम, अक्षमालाकमण्डलु।
               देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

बीज मंत्र:  ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
पूजन विधि: स्नानआदि से निवृत्त होकर पूजा स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। इसके बाद माता को अर्घ्य दें। मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं। धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।
माता का प्रिय रंग:  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता ब्रह्मचारिणी को नारंगी रंग पसंद है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Shardiya Navratri 2022 Know the nine form of Devi Durga importance pauranik katha mantra in hindi
Shardiya Navratri 2022: माता के 9 स्वरूपों का महत्व - फोटो : amar ujala

तीसरा स्वरूप- मां चंद्रघंटा
महत्व :बाघ पर सवार मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति देवी चंद्रघंटा है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी आराधना से साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी और संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है तथा स्वर में दिव्य, अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। प्रेत-बाधादि से ये अपने भक्तों की रक्षा करती है।
पौराणिक कथा: राक्षस महिषासुर से देवता और ऋषि मुनि त्रस्त थे ऐसे में सब मां आदिशक्ति के पास गए तब मत ने चंद्रघंटा के अबतर में महिषासुर का वध किया था। 
पूजन मंत्र: पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
               प्रसादं तनुते मह्मं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

बीजमंत्र: ऐं श्रीं शक्तयै नम:
पूजन विधि: सर्वप्रथम ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि करने के पश्चात पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें। अब मां चंद्रघंटा का ध्यान करें और उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। अब माता रानी को अक्षत, सिंदूर, पुष्प आदि चीजें अर्पित करें। इसके बाद मां को प्रसाद के रूप में फल और मखाने की खीर अर्पित करें। अब मां चंद्रघंटा की आरती करें। पूजा के पश्चात क्षमा याचना करें।
माता का प्रिय रंग: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां चंद्रघंटा को सफेद रंग पसंद है।

विज्ञापन
Shardiya Navratri 2022 Know the nine form of Devi Durga importance pauranik katha mantra in hindi
Shardiya Navratri 2022: माता के 9 स्वरूपों का महत्व - फोटो : amar ujala

चौथा स्वरूप- मां कूष्मांडा
महत्व :नवरात्र के चौथे दिन शेर पर सवार मां के कूष्माण्डा स्वरुप की पूजा की जाती हैं। इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं। देवी कूष्मांडा अपने भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त करके आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।
पौराणिक कथा : पौराणिक मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था तब माता ने ब्रह्मांड की रचना कर सृष्टि की आदिस्वरूपा और आदिशक्ति बन गई थीं। यह केवल एक मात्र ऐसी माता है जो सूर्यमंडल के भीतर के लोक में निवास करती हैं। 
पूजन मंत्र: सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।
              दधाना हस्तपद्माभ्यां, कूष्मांडा शुभदास्तु मे।

बीजमंत्र: ऐं ह्री देव्यै नम:।
पूजन विधि: स्नानदी से निवृत होकर मां कूष्माण्डा का ध्यान करते हुए उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं और श्रंगार करें। इसके बाद माता को गुड़हल का फूल, फल, अक्षत सिंदूर और लाल रंग का जोड़ा अर्पित करें। धूप दीप कर मां कुष्मांडा का पाठ करें और नीचे दिए मंत्रों का 108 बार जप करें। अब माता को मालपुए का भोग लगाएं।  मान्यता है कि माता को मालपुए का भोग लगाने के बाद किसी ब्राम्हण को खिलाने से माता प्रसन्न होती हैं। भोग लगाने के बाद माता की आरती करें।
माता का प्रिय रंग: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कुष्मांडा को लाल रंग पसंद है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed