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Shani Dev: शनिवार के दिन मेष सहित इन राशि के लोग करें ये काम, साढ़ेसाती से मिलेगी राहत

Sat, 14 Jun 2025 05:27 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Sat, 14 Jun 2025 05:27 AM IST
सार

Saturday Remedies for Sade Sati: शनिवार ज्योतिष और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से बेहद खास है। इस दिन मुख्य रूप से शनि महाराज की उपासना की जाती है। मान्यता है कि शनिवार को काली चीजों का दान और पीपल की पूजा करने से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।

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Shaniwar Ke Upay know Saturday Remedies for Sade Sati And Dhaiya
Saturday Remedies for Sade Sati - फोटो : adobe

Saturday Remedies for Sade Sati: शनिवार ज्योतिष और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से बेहद खास है। इस दिन मुख्य रूप से शनि महाराज की उपासना की जाती है। मान्यता है कि शनिवार को काली चीजों का दान और पीपल की पूजा करने से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। इसके अलावा शनि दोष और उससे होने वाली परेशानियां भी कम होती हैं। ज्योतिष में शनि को न्याय का देवता कहा जाता है। यदि कुंडली में उनकी स्थिति शुभ हो, तो जातक सभी बुरे प्रभावों से मुक्त और जीवन में सफलता प्राप्त करता है।



लेकिन शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव झेलने वाले जातकों की मुश्किलें अक्सर बढ़ी रहती हैं। इस साल 29 मार्च 2025 को शनि मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं। शनि के इस राशि  में आने पर कुंभ, मेष और मीन राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती बनी हुई है। इस दौरान मेष पर साढ़ेसाती का पहला चरण, मीन वालों पर दूसरा और कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण जारी है। ऐसे में शनिवार के दिन शनि चालीसा और कुछ खास मंत्रों का जाप करने से  साढ़ेसाती के प्रभाव को कम किया जा सकता है। आइए इसके बारे में जानते हैं।

Shaniwar Ke Upay know Saturday Remedies for Sade Sati And Dhaiya
Saturday Remedies for Sade Sati - फोटो : Amar Ujala
शनि चालीसा

 

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥


चौपाई

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥


परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥


कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥


सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥


पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥


बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥


रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥


नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥


भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥


हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥


श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥


पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥


रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥


वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥


गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥


जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥


तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥


समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥


अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥


पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥


दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

Shaniwar Ke Upay know Saturday Remedies for Sade Sati And Dhaiya
Saturday Remedies for Sade Sati - फोटो : अमर उजाला

शनिदेव के प्रमुख मंत्र
जानिए शनिदेव की पूजा करते वक्त किन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.

शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।

शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।

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Saturday Remedies for Sade Sati - फोटो : अमर उजाला

शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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