शनि का नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूटने लगते हैं। शनि को क्रूर ग्रह माना गया है, लेकिन शनि न्यायप्रिय देवता है। अच्छे कर्म करने वालों को शनि अच्छा परिणाम और बुरे कर्म करने वालों को बुरा फल देते हैं। ऐसे में कई बार जाने अनजाने में व्यक्ति कुछ गलतियां कर बैठता है जिससे शनि की तिरक्षी नजर पड़ जाती है और व्यक्ति शनि दोष से ग्रसित हो जाता है। शनि दोष से ग्रसित होने पर व्यक्ति के परेशानियों के दिन शुरू हो जाते हैं। आज हम आपको शनि दोष से जुड़े कुछ तथ्य के बारे में बताएंगे।
Shani Jayanti 2020: कब-कब लगता है शनि दोष, जानिए असर कम करने के उपाय
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शनि दोष किसे कहते हैं।
शनि बहुत ही धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। जब किसी जातक की कुंडली में शनि अशुभ भाव में आकर बैठ जाते हैं तो शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या आरंभ हो जाती है। इसमें जातकों को कई तरह के कष्ट भोगने पड़ते हैं। इसे ही शनि दोष कहते है।
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कई स्थितियों में किसी जातक के ऊपर शनि दोष चढ़ता है।
- शनि जब मेष राशि होता है तो उसे नीच का माना जाता है।
- जब शनि शत्रु राशि को हो जाता है तब भी शनि दोष पैदा हो जाता है। ऐसे में जातक को शनि परेशान करते हैं।
- शनि सूर्य और चंद्रमा के साथ युति बनाने पर शनि दोष पैदा होता है।
ज्योतिष गणना के अनुसार चंद्र राशि से जब शनि 12वें भाव, पहले भाव व द्वितीय भाव में रहता तो उस अवधि को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है।
जब गोचर में जन्म राशि से चतुर्थ और अष्टम भाव में रहता है तब इसे शनि की ढैय्या कहते हैं। शनि की ढय्या एक राशि पर साढ़े सात साल और दूसरी पर लगभग 16 साल में आती है।