Sawan 2022: इस समय देवों के देव महादेव का प्रिय महीना सावन चल रहा है। इस माह में शिव जी की पूजा और शिवलिंग के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। इसके अलावा इस माह में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की पूजा का विशेष विधान है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, पूरे विश्व में भगवान शिव के द्वादश यानी बारह ज्योतिर्लिंग हैं। मान्यता है कि धरती लोक के वो स्थान जहां-जहां स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए ,थे वहां ज्योतिर्लिंगों की स्थापना हुई है। शिवपुराण के रुद्र संहिता में इन बारह ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। मान्यता है कि सावन माह में इन ज्योतिर्लिंग का प्रतिदिन स्मरण करने से सात जन्मों के भी पाप मिट जाते हैं। साथ ही घर बैठे ही इन द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्तुति करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं द्वादश ज्योतिर्लिंग मंत्र और उसका अर्थ...
Sawan 2022: सावन में एक बार जरूर करें ये छोटा सा काम, घर बैठे मिलेगा 12 ज्योतिर्लिंगों की पूजा का फल
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम् ॥1॥
परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥
वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥
अर्थ
सौराष्ट्र में श्री सोमनाथ, श्रीशैल पर श्री मल्लिकार्जुन, उज्जयिनी में श्री महाकाल, ओंकारेश्वर में अमलेश्वर (अमरेश्वर), परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्री घृष्णेश्वर। जो मनुष्य प्रतिदिन सुबह शाम इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों के पाप मिट जाते हैं।
कैसे करें पाठ?
सावन माह में प्रतिदिन सुबह स्नान आदि करने के बाद किसी शिव मंदिर में जाकर पूजा करें या घर में किसी साफ स्थान पर शिवजी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शिवजी की पूजा करें।
पूजा के दौरान भगवान शिव शंकर को धतूरा, बिल्व पत्र आदि चढ़ाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद कुश के आसन पर बैठकर मन में द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति का पाठ करें। कम से कम 108 बार इस स्तुति का पाठ करें।