हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर माह की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि का खास महत्व माना गया है। इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी 2 मार्च 2021 दिन मंगलवार को पड़ रही है। चतुर्थी तिथि पर बुद्धि और शुभता के देवता विघ्नविनाशक भगवान श्री गणेश का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान गणेश की कृपा से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। तो चलिए जानते हैं गणेश चतुर्थी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि....
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Sankashti chaturthi 2021: इस दिन है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, जानें तिथि महत्व और पूजा विधि
Thu, 25 Feb 2021 04:03 PM IST
Shashi Shashi
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Thu, 25 Feb 2021 04:03 PM IST
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गणेश जी
गणेश जी
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के 32 स्वरुपों में से छठे स्वरुप की पूजा करने का विधान है। द्विजप्रिय गणपति के स्वरूप में भगवान गणेश के चार मस्तक और चार भुजाएं हैं। भगवान गणेश के इस स्वरूप की अराधना करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं। भगवान गणेश की कृपा से अच्छी सेहत और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
गणेश गजानन
संकष्टी चतुर्थी तिथि आरंभ और समाप्ति समय
चतुर्थी तिथि आरंभ- 02 मार्च 2021 दिन मंगलवार प्रातः 05 बजकर 46 मिनट से।
चतुर्थी तिथि समाप्त- 03 मार्च 2021 दिन बुधवार रात को 02 बजकर 59 मिनट पर।
चतुर्थी तिथि आरंभ- 02 मार्च 2021 दिन मंगलवार प्रातः 05 बजकर 46 मिनट से।
चतुर्थी तिथि समाप्त- 03 मार्च 2021 दिन बुधवार रात को 02 बजकर 59 मिनट पर।
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भगवान गणेश
संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
- चतुर्थी तिथि को प्रातः जल्दी स्नान कर लें।
- भगवान गणेश की पूजा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करें।
- इसके बाद पूरे दिन व्रत करें और संध्या के समय भी गणेश भगवान का विधिवत पूजन करें।
- गणेश जी के सामने धूप-दीप प्रज्वलित करें।
- इसके बाद उन्हें दूर्वा, मोदक या लड्डू को अर्पित करें।
- पूजा संपन्न होने के बाद गणेश जी की आरती करें।
- गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए।