Rudraksh Mala Pehne Ke Niyam: रुद्राक्ष देखने में भले ही एक साधारण लगे, लेकिन सनातन परंपरा में इसकी आध्यात्मिक महत्ता अत्यंत गहरी मानी गई है। शिव भक्त इसे महादेव के आशीर्वाद का प्रतीक मानकर धारण करते हैं, ताकि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सुरक्षा बनी रहे। बहुत से लोग रुद्राक्ष को गले में माला या हाथ में ब्रेसलेट के रूप में पहनते हैं, लेकिन इसे धारण करने के कुछ विशेष नियम और विधियां भी बताई गई हैं। यदि इन नियमों का पालन न किया जाए, तो इसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता।
Rudraksh Niyam: रुद्राक्ष धारण करने से पहले जान लें जरूरी नियम, गलत विधि से मिल सकते हैं विपरीत परिणाम
Rudraksh Kab Aur Kaise Pahne: सनातन परंपरा में रुद्राक्ष की आध्यात्मिक महत्ता अत्यंत गहरी मानी गई है। इसे धारण करने से पहले कुछ विशेष नियम और विधियों का पालन करना जरूरी होता है। यदि इन नियमों का पालन न किया जाए, तो इसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है। आइए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने के नियम।
रुद्राक्ष माला को अभिमंत्रित करने की विधि
रुद्राक्ष माला खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि वह खंडित न हो और उसमें पूरे 108 दाने हों। अधूरी या टूटी हुई माला शुभ नहीं मानी जाती। माला को धारण करने से पहले उसे किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के सोमवार को गंगाजल से शुद्ध करें और फिर पंचगव्य में डुबोकर पवित्र बनाएं। इसके बाद पुनः स्वच्छ जल से धोकर सफेद कपड़े से पोंछ लें।
अब एक स्वच्छ स्थान पर पीले या लाल रंग का आसन बिछाकर माला को स्थापित करें। भगवान शिव का ध्यान करते हुए इसे शिवलिंग पर अर्पित करें और धूप, दीप, अक्षत व फूल से विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते हुए माला के प्रत्येक दाने को स्पर्श करें। पूजा पूरी होने के बाद इसे प्रसाद स्वरूप श्रद्धा के साथ धारण करें।
यदि आप इस माला का उपयोग जप के लिए करना चाहते हैं, तो इसे चांदी के डिब्बे में सुरक्षित रखें और समय-समय पर उसमें इत्र की कुछ बूंदें डालकर शुद्धता बनाए रखें। जप करते समय इसे विधिपूर्वक उपयोग करें।
रुद्राक्ष धारण करने के नियम
रुद्राक्ष माला को लाल या पीले धागे में पिरोकर ही पहनना शुभ माना जाता है। काले धागे का प्रयोग वर्जित है। यदि इसे सोने या चांदी में धारण करते हैं, तो ध्यान रखें कि माला त्वचा को स्पर्श करती रहे। अपवित्र अवस्था, जैसे शौच या अंतिम संस्कार के समय इसे उतार देना चाहिए और किसी पवित्र स्थान पर रखना चाहिए।
जप के लिए प्रयोग करते समय माला को गोमुखी में रखकर दाहिने हाथ के अंगूठे और मध्यमा या अनामिका उंगली से ही मंत्र जाप करें। साथ ही, अपनी पहनी हुई माला को पूजा में इस्तेमाल न करें और न ही किसी और की माला पहनें। रुद्राक्ष को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए।
रुद्राक्ष के लाभ
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
शास्त्रों के अनुसार, सही विधि से धारण किया गया रुद्राक्ष ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है और सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है। ऐसा माना जाता है कि इसे पहनने वाले व्यक्ति पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे जीवन में शांति, संतुलन और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
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