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धर्मगुरुओं को रास नहीं आया समलैंगिकता पर सुप्रीम फैसला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 07 Sep 2018 08:03 AM IST
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समलैंगिकता के मुद्दे पर सुप्रीमकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे अपराध नहीं माना है। एक ओर जहां कुछ लोग इसका स्वागत कर रहे हैं, वहीं इस मुद्दे पर तमाम धार्मिक गुरु अब भी इसके खिलाफ हैं। क्या हिंदू और क्या मुस्लिम, दोनों धर्म से जुड़े धार्मिक गुरु इसका विरोध करते रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह की बातें किसी भी धर्म या शास्त्र में नहीं लिखी है। आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर धार्मिक गुरुओं ने क्या राय व्यक्त की —
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कोर्ट के फैसले को सभी का तरह हम भी सम्मान करेंगे। लेकिन मेरा मानना है कि समाज में गलत संदेश नहीं जाना चाहिए। इस फैसले पर सरकार को चिंतन-मंथन करना चाहिए। यह पश्चिम की विकृति है, जो हमारे यहां फैल रही है। इसका हमारे समाज से जुड़ाव नहीं होना चाहिए। भारतीय संस्कृति में अस्वीकार था, इसलिए हम तो इसे अपराध ही मानेंगे।
— स्वामी नरेंद्रगिरि, अध्यक्ष अखाड़ा परिषद
— स्वामी नरेंद्रगिरि, अध्यक्ष अखाड़ा परिषद
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समलैंगिकता को यदि धर्म से अलग भी कर दिया जाए तो हिंदुस्तान की तहजीब, यहां की संस्कृति इसके खिलाफ रही है। यदि यह अपराध नहीं, गलत नहीं तो फिर तीन-चार शादियां भी गलत नहीं माना जाएगा। हर कोई अपनी मर्जी से कुछ भी करता रहेगा। सरकार को इस पर रोक लगाना चाहिए।
— मौलाना कल्बे जव्वाद, शिया धर्मगुरु
— मौलाना कल्बे जव्वाद, शिया धर्मगुरु
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सुप्रीम कोर्ट ने जो समलैंगिकता के समर्थन में निर्णय दिया है, वह समाज, राष्ट्र के हित में कदापि नहीं है, इससे न सिर्फ समाज में अराजकता को बल मिलेगा बल्कि समाज का चारित्रिक पतन होगा एवं युवा वर्ग बर्बाद होगा तथा अपराध में और बढ़ोत्तरी होगी। यह किसी भी धर्म के अनुरूप नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निवेदन है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को संसद से तत्काल रोक लगाते हुए अध्यादेश के माध्यम से धारा 377 को अपराध की श्रेणी में रखते हुए कड़े से कड़े कानून बनाया जाए, ताकि देश के युवा वर्ग के चारित्रिक पतन से रोका जाए एवं देश की विश्व स्तर पर छवि खराब न हो सके।
— स्वामी चक्रपाणि महाराज, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारत हिंदू समाज
— स्वामी चक्रपाणि महाराज, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारत हिंदू समाज