Pushya Nakshatra 2023: ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्रों का वर्णन किया गया है और इनमें से पुष्य नक्षत्र आठवां नक्षत्र होता है। यह नक्षत्र बेहद ही शुभ और उत्तम फल देने वाला माना गया है। इस नक्षत्र को सबसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा माना गया है। पुष्य नक्षत्र को तिष्य और अमरेज्य के नाम से भी जाना जाता है। तिष्य यानी शुभ मांगलिक वाला नक्षत्र और अमरेज्य यानी देवताओं के द्वारा पूजे जाना वाला नक्षत्र। पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति और स्वामी शनि हैं।
Pushya Nakshatra 2023: कब है पुष्य नक्षत्र, किन वस्तुओं की खरीदारी के लिए होता है शुभ? जानें इसका महत्व
पुष्य नक्षत्र चार-पांच नवंबर को
इस बार दीपावली से पहले चार नवंबर से पांच नवंबर की सुबह तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। दीपावली से पहले पुष्य नक्षत्र का पड़ना बेहद शुभ माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार इस नक्षत्र के रविवार को सूर्योदय के बाद तक विद्यमान होने से इसकी शुभता में और वृद्धि हो रही है।
बेहद शुभ होता है पुष्य नक्षत्र
ज्योतिषशास्त्र में पुष्य नक्षत्र को शुभ माने जाने के कारण ज्योतिषि और विद्वान शुभ और मांगलिक कार्यों व खरीदारी के लिए इसे एक अच्छा समय मानते हैं। यह नक्षत्र इतना शुभ है कि इसमें शादी-विवाह को छोड़कर बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। खरीदारी, निवेश और बड़े व्यापारिक लेन-देन के लिए इस नक्षत्र को शुभ माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र में खरीदारी का महत्व
पुष्य नक्षत्र स्थायी होता है, इसलिए इस नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करती है। इस नक्षत्र पर बृहस्पति, शनि और चंद्र का प्रभाव होने के कारण इसमें सोना, चांदी, लोहा, बही खाता, परिधान अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना और बड़े निवेश करना अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
इन कार्यों के लिए शुभ होता है पुष्य नक्षत्र
पुष्य नक्षत्र में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना, मंत्र दीक्षा, उच्च शिक्षा ग्रहण करना, भूमि क्रय-विक्रय, यज्ञ अनुष्ठान और वेद पाठ आरंभ करना, पुस्तक दान या विद्या दान करना और विदेश यात्रा आरंभ करना श्रेष्ठ माना गया है।
पुष्य नक्षत्र में नहीं करने चाहिए ये कार्य
शादी-विवाह के लिए यह नक्षत्र शुभ नहीं माना जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार पुष्य नक्षत्र को ब्रह्मा जी का श्राप मिला हुआ है, इसलिए विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य इस नक्षत्र में किए जा सकते हैं।
कैसे होते हैं पुष्य नक्षत्र में जन्में जातक?
पुष्य नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक अतिविशिष्ट, सर्वगुण संपन्न और भाग्यशाली होते हैं। ज्योतिष जानकारों के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मे जातक महान कर्म करने वाले, बलवान, कृपालु, धार्मिक, धनी, विविध कलाओं के ज्ञाता, दयालु और सत्यवादी होते हैं। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम का जन्म भी पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था।
पुष्य नक्षत्र में जन्मीं महिलाओं का स्वभाव
महिलाओं के लिए इस नक्षत्र को और भी प्रभावशाली माना गया है। इनमें जन्मीं कन्याएं अपने कुल-खानदान का यश चारों दिशाओं में फैलाती हैं और कई महिलाओं को तो महान तपस्विनी की संज्ञा मिली है। जैसा कि कहा भी गया है- देवधर्म धनैर्युक्तः पुत्रयुक्तो विचक्षणः। पुष्ये च जायते लोकः शांतात्मा शुभगः सुखी। अर्थात्- जिस कन्या की उत्पति पुष्य नक्षत्र में होती है, वह शौभाग्य शाली, धर्म में रूचि रखने वाली, धन-धान्य एवं पुत्रों से युक्त सुंदर तथा पतिव्रता होती है।