Puja Path Niyam: किसी व्रत या त्योहार के समय यज्ञ, पूजा और आरती की जाती है। यदि इस दौरान जाने-अनजाने किसी भी प्रकार की गलती हो जाती है तो क्षमा मंत्र के साथ ही प्रायश्चित के उपाय भी किए जा सकते हैं। इससे व्रत एवं पूजा का पूरा फल पा सकते हैं। कुछ त्योहार पर देवी या देवता की स्थापना के बाद विदाई की जाती है। ऐसे में विदाई के समय पूजा पाठ में कोई भूलचूक या गलती हो गई है, तो क्षमा जरूर मांगे। इस परंपरा का आशय यह है कि भगवान हर जगह है, उन्हें न आमंत्रित करना होता है और न विदा करना। पूजा में दीपक बूझ जाए, तेल ढुल जाए, पूजा सामग्री में कोई कमी रह जाए, पूजा में कोई कमी रह जाए या फिर अन्य किसी प्रकार की गलती हो जाए तो क्षमा मंत्र बोलें।
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Puja Path Niyam: पूजा-पाठ या तीर्थ में हो जाए गलती, तो अवश्य करें ये एक सरल उपाय
Sun, 31 Aug 2025 11:09 AM IST
मेघा कुमारी
शैली प्रकाश, अमर उजाला
शैली प्रकाश, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Sun, 31 Aug 2025 11:09 AM IST
सार
Puja Path Niyam: किसी व्रत या त्योहार के समय यज्ञ, पूजा और आरती की जाती है। यदि इस दौरान जाने-अनजाने किसी भी प्रकार की गलती हो जाती है तो क्षमा मंत्र के साथ ही प्रायश्चित के उपाय भी किए जा सकते हैं।
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Puja Path Niyam
- फोटो : adobe
यह जरूरी नहीं कि पूजा पूरी तरह से शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार ही हो, मंत्र और क्रिया दोनों में चूक हो सकती है।
- फोटो : Freepik
क्षमा मांगे
यह जरूरी नहीं कि पूजा पूरी तरह से शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार ही हो, मंत्र और क्रिया दोनों में चूक हो सकती है। इसके बावजूद चूंकि मैं भक्त हूं और पूजा करना चाहता हूं, मुझसे चूक हो सकती है, लेकिन भगवान मुझे क्षमा करें। मेरा अहंकार दूर करें, क्योंकि मैं आपकी शरण में हूं। पूजा आरती के अंत में जिस भी देवी या देवता की पूजा की जा रही है, सबसे पहले उनसे क्षमा मांगे। इसके बाद क्षमा मंत्र बोलें।
Puja Path Niyam
- फोटो : adobe
पूजा में क्षमा मांगने के लिए बोला जाता है ये मंत्र
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां श्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरं।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्मतु।।
अर्थात: हे प्रभु। न मैं आपको बुलाना जानता हूं और न विदा करना। पूजा करना भी नहीं जानता। कृपा करके मुझे क्षमा करें। मुझे न मंत्र याद है और न ही क्रिया। मैं भक्ति करना भी नहीं जानता। यथासंभव पूजा कर रहा हूं, कृपया मेरी भूलों को क्षमा कर इस पूजा को पूर्णता प्रदान करें।
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां श्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरं।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्मतु।।
अर्थात: हे प्रभु। न मैं आपको बुलाना जानता हूं और न विदा करना। पूजा करना भी नहीं जानता। कृपा करके मुझे क्षमा करें। मुझे न मंत्र याद है और न ही क्रिया। मैं भक्ति करना भी नहीं जानता। यथासंभव पूजा कर रहा हूं, कृपया मेरी भूलों को क्षमा कर इस पूजा को पूर्णता प्रदान करें।
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यदि कोई गंभीर गलती हुई हो तो 43 दिनों तक नंगे पाव मंदिर जाएं।
- फोटो : freepik
प्रायश्चित के उपाय
- यदि कोई गंभीर गलती हुई हो तो 43 दिनों तक नंगे पाव मंदिर जाएं।
- मंदिर में देवता के समक्ष 108 बार साष्टांग प्रणाम करें।
- प्रायश्चित के लिए भगवान कार्तिकेय और वरुणदेव की पूजा करके उनसे क्षमा मांगें।
- श्रीमद्भागवत जी के षष्टम स्कन्ध में शुकदेव जी ने महाराज परीक्षित को प्रायश्चित के उपाय बताएं हैं उसे पढ़ें।
- प्रायश्चित के लिए पंचबलि कर्म करें और दान दें।
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शास्त्रों में 32 तरह के सेवा अपराध बताएं गए हैं। इन्हें जानकर भी पूजा या देव सेवा की गलतियों से बचा जा सकता है।
- फोटो : Amar Ujala
देव पूजा, मंदिर या तीर्थ संबंधित 32 सेवा अपराध
शास्त्रों में 32 तरह के सेवा अपराध बताएं गए हैं। इन्हें जानकर भी पूजा या देव सेवा की गलतियों से बचा जा सकता है।
1. सवारी पर चढ़कर अथवा पैरों में खड़ाऊ पहनकर श्री भगवान के मंदिर में जाना।
2. रथयात्रा, जन्माष्टमी आदि उत्सवों का न करना या उनके दर्शन न करना।
3. श्रीमूर्ति के दर्शन करके प्रणाम न करना।
4. अशौच-अवस्था में दर्शन करना।
5. एक हाथ से प्रणाम करना।
6. परिक्रमा करते समय भगवान के सामने आकर कुछ देर न रुककर फिर परिक्रमा करना अथवा केवल सामने ही परिक्रमा करते रहना।
7. श्री भगवान के श्रीविग्रह के सामने पैर पसारकर बैठना।
8. दोनों घुटनों को ऊंचा करके उनको हाथों से लपेटकर बैठ जाना।
9. मूर्ति के समक्ष सो जाना।
10. भोजन करना।
11. झूठ बोलना
12. श्री भगवान के श्रीविग्रह के सामने जोर से बोलना।
13. आपस में बातचीत करना।
14. मूर्ति के सामने चिल्लाना।
15. कलह करना
16. पीड़ा देना।
17. किसी पर अनुग्रह करना।
18. निष्ठुर वचन बोलना।
19. कम्बल से सारा शरीर ढंक लेना।
20. दूसरों की निंदा करना।
शास्त्रों में 32 तरह के सेवा अपराध बताएं गए हैं। इन्हें जानकर भी पूजा या देव सेवा की गलतियों से बचा जा सकता है।
1. सवारी पर चढ़कर अथवा पैरों में खड़ाऊ पहनकर श्री भगवान के मंदिर में जाना।
2. रथयात्रा, जन्माष्टमी आदि उत्सवों का न करना या उनके दर्शन न करना।
3. श्रीमूर्ति के दर्शन करके प्रणाम न करना।
4. अशौच-अवस्था में दर्शन करना।
5. एक हाथ से प्रणाम करना।
6. परिक्रमा करते समय भगवान के सामने आकर कुछ देर न रुककर फिर परिक्रमा करना अथवा केवल सामने ही परिक्रमा करते रहना।
7. श्री भगवान के श्रीविग्रह के सामने पैर पसारकर बैठना।
8. दोनों घुटनों को ऊंचा करके उनको हाथों से लपेटकर बैठ जाना।
9. मूर्ति के समक्ष सो जाना।
10. भोजन करना।
11. झूठ बोलना
12. श्री भगवान के श्रीविग्रह के सामने जोर से बोलना।
13. आपस में बातचीत करना।
14. मूर्ति के सामने चिल्लाना।
15. कलह करना
16. पीड़ा देना।
17. किसी पर अनुग्रह करना।
18. निष्ठुर वचन बोलना।
19. कम्बल से सारा शरीर ढंक लेना।
20. दूसरों की निंदा करना।