प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। हर माह दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। वार के अनुसार प्रदोष व्रत का नाम होता है, इस बार त्रयोदशी तिथि 10 जनवरी दिन रविवार को पड़ रही है, इसलिए इस बार यह रविप्रदोष व्रत होगा। यह तिथि भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु बहुत महत्वपूर्ण होती है। अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग-अलग होती है। वार के अनुसार भी इस व्रत का महत्व और लाभ भी उसी के अनुसार प्राप्त होता है। इस बार रवि प्रदोष है इसलिए भगवान शिव के साथ सूर्य देव की कृपा भी प्राप्त होगी।
10 जनवरी को है रवि प्रदोष व्रत, जानिए मुहूर्त और फायदे
प्रदोष व्रत का मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि आरंभ- 10 जनवरी दिन रविवार को शाम 04 बजकर 52 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त- 11 जनवरी दिन सोमवार को दोपहर 02 बजकर 32 मिनट तक, तत्पश्चात व्रत का पारणा करें।
प्रदोष व्रत त्रयोदशी यानि तेरस को किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव के साथ कामदेव की भी मानी गई है। यह व्रत करने से उत्तम पत्नी की प्राप्ति होती है।
यह व्रत करने से भगवान शिव की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इस तिथि को विजय प्रदान करने वाली तिथि माना गया है।
पुराणों अनुसार जो मनुष्य हर त्रयोदशी तिथि को प्रदोष का व्रत करता है। वह हर संकट को आसानी से पार कर लेता है।
नियम पूर्वक पूरे विधि-विधान से जो भी प्रदोष व्रत करता है। उसके जीवन में हमें धन और समृद्धि बनी रहती है।
शास्त्रों में भी प्रदोष व्रत की महिमा बताई गई है। जो भी मनुष्य 11 अथवा एक वर्ष के समस्त त्रयोदशी के व्रत श्रद्धा से करता है। उसको कार्यसिद्धि प्राप्त होती है और बहुत शीघ्र उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
रविवार को प्रदोष व्रत पड़ने के लाभ
रविवार को पड़ने वाले प्रदोष का संबंध सीधा सूर्य से होता है। यह व्रत करने से शिव जी, चंद्रमा के साथ सूर्य की कृपा भी प्राप्त होती है।
रवि प्रदोष व्रत करने से चंद्र के साथ सूर्य भी शुभ फल प्रदान करता है। सूर्य को मजबूत मिलती है, जिससे समाज में आपकी मां प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। सूर्य से संबंधित सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
रवि प्रदोष व्रत करने से लंबी आयु प्राप्त होती है।
रवि प्रदोष के दिन भगवान शिव पूजा और व्रत करने से जीवन की चिंताएं समाप्त होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।