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Pradosh Vrat: पहली बार करने जा रहे हैं प्रदोष व्रत? जानें पूजा विधि से लेकर उद्यापन तक के नियम
Fri, 06 Jun 2025 11:00 AM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Fri, 06 Jun 2025 11:00 AM IST
सार
प्रदोष व्रत हर मास की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, इसलिए इसे त्रयोदशी व्रत भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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प्रदोष व्रत की शुरुआत कैसे करें?
- फोटो : adobe stock
Pradosh Vrat Kaise Kare: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है। यह व्रत हर मास की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, इसलिए इसे त्रयोदशी व्रत भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय है। कहा जाता है कि इस उपवास को करने से मनुष्य की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और शिवजी के साथ-साथ माता पार्वती की कृपा भी प्राप्त होती है। यदि आप पहली बार प्रदोष व्रत रखने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं इसकी सही विधि।
प्रदोष व्रत की शुरुआत कैसे करें?
- फोटो : freepik
संध्या समय विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करें, आरती करें और भोग लगाएं। प्रदोष काल में रुद्राभिषेक करना अति फलदायी माना जाता है। इसका बाद कथा और आरती के साथ व्रत को पूर्ण करें। व्रती को दिनभर उपवास रखना चाहिए और संध्या पूजा के बाद अथवा अगले दिन व्रत खोलना चाहिए।
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व्रत के दौरान क्या खाएं?
- फोटो : adobe stock
व्रत के दौरान क्या खाएं?
प्रदोष व्रत के दिन आप फलाहार स्वरूप कुछ चीजें खा सकते हैं, जैसे साबूदाने की खीर, कुट्टू के आटे के पकौड़े, उबले आलू, ताजे फल, दूध, दही, सिंघाड़े का हलवा, समा के चावल, नारियल पानी, केले के चिप्स, और फलों की चाट आदि।
प्रदोष व्रत कब से शुरू करें?
प्रदोष व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से आरंभ किया जा सकता है, लेकिन सावन और कार्तिक माह में इसका आरंभ विशेष फलदायी माना गया है।
प्रदोष व्रत के दिन आप फलाहार स्वरूप कुछ चीजें खा सकते हैं, जैसे साबूदाने की खीर, कुट्टू के आटे के पकौड़े, उबले आलू, ताजे फल, दूध, दही, सिंघाड़े का हलवा, समा के चावल, नारियल पानी, केले के चिप्स, और फलों की चाट आदि।
प्रदोष व्रत कब से शुरू करें?
प्रदोष व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से आरंभ किया जा सकता है, लेकिन सावन और कार्तिक माह में इसका आरंभ विशेष फलदायी माना गया है।
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कितने प्रदोष व्रत रखें?
- फोटो : adobe stock
कितने प्रदोष व्रत रखें?
मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति को कम से कम 11 या अधिकतम 26 त्रयोदशी व्रत करने चाहिए। इसके बाद उद्यापन अवश्य करना चाहिए, जिससे भगवान शिव की कृपा स्थायी बनी रहती है।
मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति को कम से कम 11 या अधिकतम 26 त्रयोदशी व्रत करने चाहिए। इसके बाद उद्यापन अवश्य करना चाहिए, जिससे भगवान शिव की कृपा स्थायी बनी रहती है।
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उद्यापन कैसे करें?
- फोटो : adobe stock
उद्यापन कैसे करें?
उद्यापन से एक दिन पहले भगवान गणेश की पूजा करें और रात्रि जागरण करें। प्रातःकाल स्नान कर पूजा के लिए मंडप सजाएं।शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करें। हवन और कीर्तन करें। हवन में खीर की आहुति दें। ब्राह्मणों को भोजन करवाएं, उन्हें वस्त्र और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
उद्यापन से एक दिन पहले भगवान गणेश की पूजा करें और रात्रि जागरण करें। प्रातःकाल स्नान कर पूजा के लिए मंडप सजाएं।शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन करें। हवन और कीर्तन करें। हवन में खीर की आहुति दें। ब्राह्मणों को भोजन करवाएं, उन्हें वस्त्र और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।