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Pradosh Vrat 2021: इस दिन है अप्रैल महीने का पहला प्रदोष व्रत, जानिए महत्व, तिथि और भगवान शिव की पूजा विधि

Thu, 01 Apr 2021 11:01 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 01 Apr 2021 11:01 AM IST
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Pradosh vrat 2021 know the date time significance and vrat puja vidhi of Chaitra Krishna pradosh vrat
प्रदोष व्रत

प्रत्येक माह में दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानि इस माह का पहला प्रदोष व्रत 9 अप्रैल दिन शुक्रवार को पड़ रहा है। इस दिन सच्चे हृदय से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल यानि संध्या समय में की जाती है। जानिए इस व्रत की महिमा, समय और पूजा विधि।

Pradosh vrat 2021 know the date time significance and vrat puja vidhi of Chaitra Krishna pradosh vrat
प्रदोष व्रत
शुभ मुहूर्त-

चैत्र कृष्ण त्रयोदशी तिथि आरंभ- 9 अप्रैल 2021 दिन शुक्रवार प्रातः 03 बजकर 15 मिनट से

त्रयोदशी तिथि समाप्त- 10 अप्रैल 2021 दिन शनिवार प्रातः 04 बजकर 27 मिनट पर


प्रदोष व्रत पूजा का समय- 09 अप्रैल को शाम 05 बजकर 55 मिनट से लेकर 08 बजकर 12 मिनट तक

 

पूजा की कुल अवधि- 02 घंटा 17 मिनट

 

Pradosh vrat 2021 know the date time significance and vrat puja vidhi of Chaitra Krishna pradosh vrat
प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत का महत्व

इस बार त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को पड़ने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा। अलग-अलग दिनों पर प्रदोष व्रत का फल उसी के अनुसार प्राप्त होता है। शुक्र प्रदोष व्रत करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है। यह व्रत बहुत ही मंगलकारी और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है।

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प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
  • त्रयोदशी तिथि को ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें।
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प करें। 
  • धूप दीप जलाकर पूजा करें और पूरे दिन निराहार रहकर व्रत का पालन करें।
  •  संध्याकाल में सूर्यास्त होने के पौन घंटे पहले स्नान करके श्वेत वस्त्र पहने।
  • ईशान कोण में किसी एकांत जगह पूजा के लिए उस स्थान पर गंगाजल से शुद्ध कर लें।
  • उस स्थान पर गाय के गोबर से लीपकर चौकोर बना लें। 
  • इसके बाद पांच रंगों और फूलों से चौक बना लें। 
  • स्वयं के लिए कुश का आसन बिछाएं में उत्तर-पूर्व की दिशा और मुख करके बैठे।
  • भगवान शिव की पूजा आरंभ करें। 
  • ऊं नम: शिवाय: का उच्चारण करते हुए शिव जी का जल से अभिषेक करें।
  • अब धूप दीप नैवेद्य और पुष्प से विधिवत पूजा अर्चना करें।
  • पूजा करके आरती करें और शिव मंत्रों का जाप करें।
  • कथा पढ़ें और पूजा पूर्ण करने के बाद सभी को प्रसाद अर्पित करें।

 

 

 

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