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Pradosh Vrat March 2021: इस दिन है मार्च का दूसरा प्रदोष व्रत, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि

Fri, 19 Mar 2021 02:50 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 19 Mar 2021 02:50 PM IST
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Pradosh Vrat 2021 date timing shubh muhurat puja samagri importance and vrat puja vidhi
प्रदोष व्रत 2021

प्रत्येक माह में दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष किया जाता है। इस माह का दूसरा प्रदोष व्रत 26 मार्च 2021 दिन शुक्रवार को रखा जाएगा। प्रदोष व्रत का नाम उसके दिन के अनुसार होता है। इस बार त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को पड़ने के कारण यह शुक्रप्रदोष कहलाएगा। यह तिथि भगवान शिव को समर्पित की जाती है। प्रदोष व्रत में पूरे शिव परिवार की पूजा करने का विधान है। इस व्रत का बहुत महत्व माना गया है। नियम और निष्ठा के साथ प्रदोष व्रत करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। जिससे आपको जीवन के कष्टो से छुटकारा मिलता है। जानिए प्रदोष व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त, नियम और पूजा विधि... 

Pradosh Vrat 2021 date timing shubh muhurat puja samagri importance and vrat puja vidhi
प्रदोष व्रत 2021

मार्च के दूसरे प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि आरंभ - 26 मार्च 2021 सुबह 08 बजकर 21 मिनट से 
फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि समाप्त - 27 मार्च 2021 सुबह 06 बजकर 11 मिनट पर

प्रदोष व्रत पूजा का समय
26 मार्च को शाम 06 बजकर 36 मिनट से रात्रि 08 बजकर 56 मिनट तक
 
 

Pradosh Vrat 2021 date timing shubh muhurat puja samagri importance and vrat puja vidhi
प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : google

प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन से सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत बहुत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि शुक्रवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और संपन्नता प्रदान करता है। इस व्रत को करने से भगवान शिव की असीम कृपा बनी रहती है।
 

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प्रदोष व्रत 2021

प्रदोष व्रत पूजा की सामाग्री
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा की सभी चीजों के पहले से ही एकत्रित करके रख लेना चाहिए ताकि पूजा करते समय किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। प्रदोष व्रत में पूजा पूजा की थाली में पांच प्रकार के फल, घी, दही, शहद, शक्कर, गाय का दूध, गुड़, गन्ना, गन्ने का रस, अबीर, गुलाल, चंदन, अक्षत, धतूरा, बेलपत्र, शमी के पत्ते, जनेऊ, कलावा, दीपक, कपूर, धूपबत्ती आदि सामाग्री रखनी चाहिए।
 

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प्रदोष व्रत 2021

प्रदोष व्रत पूजा विधि-

  • त्रयोदशी तिथि को प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प करें। 
  • इसके बाद भगवान शिव का पूजन करें। 
  • पूरे दिन निराहार रहकर या अपनी क्षमतानुसार व्रत करें। 
  • इसके पश्चात संध्या के समय प्रदोष काल में पूजन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का पूजन करें।
  • भगवान शिव की अभिषेक करके उनकी प्रिय चीजें अर्पित करें।
  • भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त से पौन घंटे यानि 45 मिनट पहले आरंभ कर देनी चाहिए। 
  • पूजा करने के पश्चात कुशा के आसन पर बैठककर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।


शिव जी का मंत्र- 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः'  
 

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