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श्राद्ध नियम: पितृ पक्ष में गाय और कौवे को भोजन क्यों कराते हैं? जानें धार्मिक महत्व

Wed, 07 Oct 2026 06:06 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 07 Oct 2026 06:06 PM IST
सार

श्राद्ध कर्म में ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ पंचबली की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी गई है। हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों के गंगा घाटों से लेकर घरों तक लोग भोजन का एक अंश गाय, कौवे और अन्य जीवों के लिए निकालते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन जीवों को भोजन अर्पित करना पितरों तक श्रद्धा पहुंचाने का माध्यम माना गया है।
 

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Pitru shradh cows and crows feeding religious significance in hindi
श्राद्ध में गाय-कौवे को भोजन का महत्व - फोटो : AI

सनातन परंपरा में पितृ पक्ष के 16 दिनों को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस अवधि में पितरों की आत्मिक शांति और तृप्ति की कामना से तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध तथा दान-पुण्य जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।



श्राद्ध कर्म में ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ पंचबली की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी गई है। हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों के गंगा घाटों से लेकर घरों तक लोग भोजन का एक अंश गाय, कौवे और अन्य जीवों के लिए निकालते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन जीवों को भोजन अर्पित करना पितरों तक श्रद्धा पहुंचाने का माध्यम माना गया है।

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Pitru shradh cows and crows feeding religious significance in hindi
गाय को भोजन कराने की मान्यता - फोटो : Freepik

गाय को भोजन कराने की मान्यता
हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार गौसेवा से अनेक देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। पावन धाम के महामंत्री एवं तीर्थ पुरोहित अंशुल श्री कुंज के अनुसार, श्राद्ध के दौरान पंचबली निकालने का विधान बताया गया है। इसमें गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी तथा देवी-देवताओं के निमित्त भोजन अर्पित किया जाता है।
 

Pitru shradh cows and crows feeding religious significance in hindi
गाय को भोजन कराने की मान्यता - फोटो : adobe stock

मान्यता है कि पितरों की किसी कारणवश अधोगति होने पर उनकी आत्मा को आगे की यात्रा में विभिन्न अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है। इसी धार्मिक विश्वास के तहत गाय को भोजन कराने को पितरों की शांति से जोड़ा जाता है। श्राद्ध के दिनों में रोटी, हरा चारा, चोकर, गुड़ आदि खिलाने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे पितरों की तृप्ति होती है और परिवार को उनका आशीर्वाद मिलता है।

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कौवे को भोजन क्यों कराया जाता है? - फोटो : adobe stock

कौवे को भोजन क्यों कराया जाता है?
पितृ पक्ष में कौवे को अन्न अर्पित करने की परंपरा भी प्राचीन है। धार्मिक मान्यताओं में कौवे को यमराज का दूत और पितरों से जुड़ा प्रतीक माना गया है। इसलिए श्राद्ध का भोजन कौवे को खिलाने को विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

ऐसा विश्वास है कि कौवे के माध्यम से पितरों तक अन्न पहुंचता है। यदि श्राद्ध का भोजन कौवा ग्रहण कर ले, तो इसे पूर्वजों द्वारा अर्पण स्वीकार किए जाने का शुभ संकेत माना जाता है।

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स्थानीय लोगों की मान्यता - फोटो : adobe stock

स्थानीय लोगों की मान्यता
हरिद्वार में श्रद्धालु लंबे समय से पितृ पक्ष के दौरान कौवों को भोजन और पानी तथा गायों को ग्रास देने की परंपरा निभाते आ रहे हैं। उनका विश्वास है कि इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है, कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और परिवार पर पूर्वजों की कृपा बनी रहती है। धार्मिक आस्था के अनुसार, श्रद्धापूर्वक की गई गौसेवा और जीवों को अन्न अर्पित करना पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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