Pitru Paksha 2025: भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष चलता है जिसे पितृपक्ष भी कहते हैं। यदि आप इस दौरान अपने पितरों का श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान करने जा रहे हैं तो यह भी जान लें कि शास्त्रों के अनुसार किस स्थान पर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए और किस जगह पर श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। जानते हैं विस्तार से....
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Pitru Paksha 2025: इन चार जगहों पर भूलकर भी नहीं करना चाहिए तर्पण और पिंडदान, जानें कहां कर सकते हैं
Tue, 09 Sep 2025 07:11 AM IST
ज्योति मेहरा
शैली प्रकाश
शैली प्रकाश
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Tue, 09 Sep 2025 07:11 AM IST
सार
पितरों का श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान करने के लिए यह जानना जरूरी है कि किस स्थान पर श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए और किस जगह पर श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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पितृ पक्ष
- फोटो : amarujala
वर्जित है इन 4 जगहों पर श्राद्ध कर्म करना
- फोटो : freepik
वर्जित है इन 4 जगहों पर श्राद्ध कर्म करना
- देव स्थान: किसी मंदिर के भीतर या परिसर में या किसी भी अन्य देवस्थान श्राद्ध कर्म नहीं करना चाहिए क्योंकि यह देवभूमि होती है। पंडित या विद्वान की सलाह पर ही स्थान का चयन करें।
- अपवित्र भूमि: किसी भी प्रकार से अपवित्र हो रही भूमि पर भी श्राद्ध नहीं करते हैं। कांटेदार भूमि या बंजर भूमि पर भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए। जहां लोग खुले में मल-मूत्र त्यागने जाते हैं वहां भी श्राद्ध नहीं करना चाहिए भले ही उस भूमि को शुद्ध कर लिया गया हो।
वर्जित है इन 4 जगहों पर श्राद्ध कर्म करना
- फोटो : freepik
- दूसरों की भूमि : किसी दूसरे की व्यक्तिगत भूमि पर भी श्राद्ध नहीं करना चहिए। यदि दूसरे के घर या भूमि पर श्राद्ध करना पड़े तो किराया या दक्षिणा भूस्वामी को दे देना चाहिए।
- शमशान : किसी ऐसे शमशान में श्राद्ध नहीं कर सकते हैं जिसे तीर्थ नहीं माना जाता। देश में कुछ ऐसे श्मशान हैं जिन्हें तीर्थ माना जाता है। जैसे उज्जैन का चक्रतीर्थ शमशान घाट को तीर्थ का दर्जा प्राप्त है। हालांकि ऐसी जगहों पर श्राद्ध करना मजबूरी हो तो ही करें। वैसे तीर्थ शमशान में श्राद्ध करने के पहले किसी विद्वान से सलाह जरूर लें।
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इन 8 में से किसी एक जगह पर कर सकते हैं श्राद्ध
- फोटो : adobe stock
इन 8 में से किसी एक जगह पर कर सकते हैं श्राद्ध
- नदी तट : किसी भी पवित्र नदी या नदी के नदी संगम तट पर उचित समय में विधि-विधान से श्राद्ध किया जा सकता है।
- तीर्थ क्षेत्र : शास्त्रों में उल्लेखित किसी तीर्थ क्षेत्र में भी श्राद्ध किया जा सकता है। देशभर में गया, नासिक और उज्जैन सहित 64 से ज्यादा श्राद्ध तर्पण के स्थान हैं।
- समुद्र : समुद्र के तट पर भी श्राद्ध किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए समुद्री तट के किसी पवित्र स्थान का चयन करने ही श्राद्ध कर्म करें।
- घर : श्राद्ध कर्म आप अपने घर पर ही करें तो ज्यादा उचित होगा। यदि पितरों की मुक्ति के लिए विशेष श्राद्ध कर्म करना हो तो ही नदी के तट या गया जैसे स्थानों का चयन करें।
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इन 8 में से किसी एक जगह पर कर सकते हैं श्राद्ध
- फोटो : अमर उजाला
- बरगद : पवित्र वट वृक्ष अर्थात बरगद के पेड़ के नीचे भी श्राद्ध कर्म किया जा सकता है, बशर्ते की वहां कोई देव स्थान न हो।
- गोशाला : जहां बैल नहीं बांधे जाते हों ऐसी गौशाला में भी उचित स्थान को गोबर से लीपकर शुद्ध करके श्राद्ध किया जा सकता है।
- पर्वत : किसी पवित्र पर्वत शिखर पर देव स्थान को छोड़कर भी श्राद्ध किया जा सकता है।
- जंगल : किसी भी छोटे या बड़े वनों में उचित स्थान देखकर उसे स्वच्छ करके विधिपूर्वक श्राद्ध किया जा सकता है।
- शैली प्रकाश