हिंदू पंचांग के नए महीने कि शुरुआत शुक्रवार, 13 दिसंबर से हो रही है, जो 10 जनवरी तक रहेगा। धार्मिक मानयताओं के अनुसार इस मास में व्रत करने से सफलता, आरोग्य, संतान, सौभाग्य, सुख, सौन्दर्य आदि की प्राप्ति होती है। अगली स्लाइड्स में जानते हैं पौष मास में पड़ने वाले सभी व्रत और उनके महत्व के बारे में।
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13 दिसंबर से पौष मास शुरू, व्रत करने से बदल जाता है भाग्य
Thu, 12 Dec 2019 08:22 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Thu, 12 Dec 2019 08:22 PM IST
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पौष मास में पड़ने वाले सभी व्रत और उनके महत्व
पौष कृष्ण अष्टमी के दिन श्राद्ध कर्म किए जाते हैं
- फोटो : अमर उजाला
पौष कृष्ण अष्टमी
- पौष कृष्ण अष्टमी के दिन श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। ऐसा करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
पौष कृष्ण एकादशी
पौष कृष्ण एकादशी
- पौष कृष्ण एकादशी के दिन व्रत करने से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
- पौष शुक्ल एकादशी को पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है। इस व्रत के करने से पुत्र की प्राप्ति होती है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए। एकादशी के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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कृष्ण द्वादशी को सुरूपा द्वादशी कहा जाता है
सुरूपा द्वादशी
- पौष मास की कृष्ण द्वादशी को सुरूपा द्वादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत करने से संतान, सौन्दर्य, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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पौष शुक्ल द्वितीया के दिन व्रत करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है
आरोग्य व्रत
- पौष शुक्ल द्वितीया के दिन आरोग्य व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत करने से सभी तरह के रोग नष्ट होते हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है।