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13 दिसंबर से पौष मास शुरू, दीर्घायु के लिए करें सूर्य नारायण भगवान की पूजा
Thu, 12 Dec 2019 08:22 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Thu, 12 Dec 2019 08:22 PM IST
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इस साल पौष मास 13 दिसंबर, शुक्रवार से शुरू हो रहा है, जो 10 जनवरी, शुक्रवार तक रहेगा
धार्मिक ग्रंथो के अनुसार पौष के महीने में सूर्य देव ग्यारह हजार किरणों के साथ धरती वासियों को सर्दी से राहत देते हैं
वेद और उपनिषद में सूर्य की महत्वता
- अथर्ववेद और सूर्योपनिषद में सूर्य देव को परब्रह्म माना गया है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार पौष के महीने में सूर्य देव ग्यारह हजार किरणों के साथ धरती वासियों को सर्दी से राहत देते हैं। सूर्य देव का वर्ण रक्त के समान है। शास्त्रों के अनुसार ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य ही भग है और इनसे युक्त को ही भगवान माना गया है। इसी कारणवश पौष मास का भग नामक सूर्य साक्षात परब्रह्म का ही स्वरूप है। धर्म शास्त्रों के अनुसार पौष मास में सूर्य को अर्घ्य देने तथा व्रत करने से विशेष फल मिलता है।
हर रविवार को तांबे के बर्तन में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें
पौष मास में क्या करें
- हर रविवार को तांबे के बर्तन में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- अगर व्रत रख सकते हैं तो इस महीने में रविवार के दिन व्रत रखना चाहिए और खाने में नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। सिर्फ फलाहार ही करना चाहिए।
- रविवार के व्रत के दिन सूर्य को तिल-चावल की खिचड़ी का भोग लगाएं, ऐसा करने से व्यक्ति तेजस्वी बनता है।
- धार्मिक पुराणों में इस बात का भी वर्णन है कि पौष माह में तीर्थ में स्नान करने से और दान पुण्य करने से उम्र लंबी होती है और बीमारियां दूर हो जाती हैं।