भगवान विष्णु हर साल आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन चार महीने के लिए सो जाते हैं। इस वर्ष भगवान विष्णु के सोने की यह तिथि 15 जुलाई है। इस दिन से भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी 11 नवंबर तक शयन करेंगे। शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान विष्णु जब तक सोते हैं उन दिनों में कोई भी शुभ काम जैसे शादी, जनेऊ, मुंडन, मकान की नींव डालने का काम नहीं किया जाता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में भगवान विष्णु सो जाते हैं या भगवान के सोने का कुछ और मतलब है।
तो यह है भगवान विष्णु के चार महीने तक सोने का रहस्य
इन सवालों का जवाब शास्त्रों और पुराणों में दिया गया है। पुराणों में बताया गया है कि राजा बलि ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। घबराए इंद्र ने जब भगवान विष्णु से सहायता मांगी तो विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि से दान मांगने पहुंच गए। वामन भगवान ने दान में तीन पग भूमि मांगी। दो पग में भगवान ने धरती और आकाश नाप लिया और तीसरा पग कहां रखे जब यह पूछा तो बलि ने कहा कि उनके सिर पर रख दें। इस तरह बलि से तीनों लोकों को मुक्त करके भगवान विष्णु ने देवराज इंद्र का भय दूर किया। लेकिन राजा बलि की दानशीलता और भक्ति भाव देखकर भगवान विष्णु ने बलि से वर मांगने के लिए कहा।
तो यह है भगवान विष्णु के चार महीने तक सोने का रहस्य
बलि ने भगवन से कहा कि आप मेरे साथ पाताल चलें और हमेशा वहीं निवास करें। भगवान विष्णु ने अपने भक्त बलि की इच्छा पूरी की और पाताल चले गए। इससे सभी देवी-देवता और देवी लक्ष्मी चिंतित हो उठी। देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त कराने लिए एक चाल चली और पहुंच गई एक गरीब स्त्री बनकर राजा बलि के पास। इन्होंने राजा बलि को राखी बांधी और बदले में भगवान विष्णु को पाताल से मुक्त करने का वचन मांग लिया।
तो यह है भगवान विष्णु के चार महीने तक सोने का रहस्य
भगवान विष्णु अपने भक्त को निराश नहीं करना चाहते थे इसलिए बलि को वरदान दिया कि वह साल आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक पाताल लोक में निवास करेंगे।
तो यह है भगवान विष्णु के चार महीने तक सोने का रहस्य
इसलिए इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और वामन रूप में भगवान का अंश पाताल लोक में होता है। एक अन्य कथा है कि शंखचूर नाम के असुर से भगवान विष्णु का लंबा युद्ध चला और अंत में असुर मारा गया।