Sawan Tuesday Mangla Gauri Vrat: हिंदी श्रावण मास हिंदू कैलेंडर का सबसे शुभ महीना है। पूरा महीना शिव और शक्ति को समर्पित है। भक्त प्रत्येक सोमवार को श्रवण सोमवार व्रत रखते हैं जबकि मंगला गौरी व्रत प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए असंख्य व्रत रखे थे और उनमें से एक है मंगला गौरी व्रत।विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए आशीर्वाद लेने के लिए व्रत रखती हैं जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छा पति पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। यदि किसी के दांपत्य जीवन में कोई कष्ट होता है तो वह भी मां पार्वती की कृपा से दूर हो जाता है। अगर व्रती को संतान प्राप्ति की मनोकामना है तो यह व्रत करने से उसकी यह मनोकामना भी पूरी होती है। साथ ही व्रती को मां का आर्शीवाद मिलता है। श्रावण के साथ, पहला मंगला गौरी व्रत 19 जुलाई को पड़ेगा और आखिरी मंगला गौरी व्रत 9 अगस्त को होगा। व्रत श्रावण के महीने में हर मंगलवार को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं पहला मंगला गौरी व्रत कब पड़ेगा, व्रत विधि और मंत्र जाप
Mangla Gauri Vrat: सावन माह के मंगलवार को रखा जाता है मंगला गौरी व्रत, जानें इसके बारे में
क्या है मंगला गौरी व्रत
मंगला गौरी व्रत देवी पार्वती या गौरी की पूजा के लिए समर्पित है। मंगला गौरी व्रत घर की समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक आनंद के आशीर्वाद के लिए रखा जाता है। श्रावण मास में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को मां मंगला का व्रत रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सुहागिन महिलाओं को मां मंगला व्रत करने से अखंड सौभाग्य प्राप्ति होती है और संतान का जीवन सुखमय बीतता है। सावन माह में सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है और अगले दिन मंगलवार को मां मंगला गौरी का व्रत शिवजी की अर्धांगिनी माता पार्वती को समर्पित होता है।
मंगला गौरी व्रत की तिथि
इस बार सावन माह का आरंभ 14 जुलाई से हो रहा है, जो कि 12 अगस्त तक रहेगा। वहीं इस सावन में चार मंगलवार पड़ रहे हैं।
प्रथम मंगला गौरी व्रत - 19 जुलाई 2022, दिन मंगलवार
दूसरा मंगला गौरी व्रत - 26 जुलाई 2022, दिन मंगलवार
तीसरा मंगला गौरी व्रत - 2 अगस्त 2022, दिन मंगलवार
चतुर्थी मंगला गौरी व्रत - 9 अगस्त 2022, दिन मंगलवार
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
- मंगलवार को प्रातः जल्द उठें और व्रत करने का संकल्प लें।
- स्नान आदि के बाद घर के मंदिर में भगवान के सामने मंगला गौरी मां का संकल्प लें।
- इसके बाद मां मंगला गौरी यानी पार्वतीजी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- मूर्ति को लाल वस्त्र धरण कराएं।
- इसके बाद आटे से बना दीपक घी भरकर जलाकर आरती करें।
- इसके बाद ॐ उमामहेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें।
- माता को हार-फूल, लड्डू, फल, पान, इलाइची, लौंग, सुपारी, सुहाग का सामान और मिठाई चढ़ाएं।
- इसके बाद मंगला गौरी की कथा सुनें।
- पूजा के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंद लोगों को धन-अनाज का दान करें।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- ध्यान रखें लगातार पांच साल तक मंगला गौरी पूजन करने के बाद पांचवें वर्ष में सावन माह के अंतिम मंगलवार को इस व्रत का उद्यापन करना चाहिए। तभी ये व्रत पूरा हो पाता है।
- मंगला गौरी व्रत में माता को 16 मालाएं, आटे के लड्डू, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और सुहाग सामग्री अर्पित करते हैं।
- मंगला गौरी पूजा में 16 की संख्या का बहुत महत्व है, इसलिए पूजा में दीपक 16 बत्तियों वाला जलाना चाहिए। वहीं माता को 16 वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए।