Mahashivratri 2022: आज यानी 1 मार्च को महाशिवरात्रि का पावन पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जिसे हर साल महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान भोलेनाथ ने वैराग्य जीवन त्याग कर माता पार्वती के साथ गृहस्थ जीवन अपनाया था। आज भी जब कभी सुखी दांपत्य जीवन की बात होती है, तो माता पार्वती और भोले शंकर को सर्वोच्च उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। माता पार्वती और महादेव के अप्रतिम प्रेम से पूरा संसार वाकिफ है। कुंवारी लड़कियां भी सोमवार का व्रत और भोलेनाथ की पूजा इसलिए करती हैं ताकि उन्हें शिवजी की तरह पति मिले। सिर्फ दांपत्य जीवन ही नहीं बल्कि बेटे कार्तिकेय और गणेश के साथ उनके संबंध भी हमें सुखी गृहस्थी से जुड़ी कई बातें सिखाते हैं। तो आइए आज महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर जानते हैं माता पार्वती और भोलेनाथ के सुखी गृहस्थी के रहस्य....
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Mahashivratri 2022: महाशिवरात्रि का पावन पर्व आज, भोले शंकर और पार्वती के विवाह के दिन जानिए सुखी गृहस्थी के रहस्य
Tue, 01 Mar 2022 10:01 AM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Tue, 01 Mar 2022 10:01 AM IST
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इस महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती से सीखें- कैसे चलाएं घर, द्वार और परिवार
- फोटो : iStock
इस महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती से सीखें- कैसे चलाएं घर, द्वार और परिवार
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शिव को पाने के लिए पार्वती का कठोर संकल्प
- कहा जाता है कि माता पार्वती भोलेनाथ को मन ही मन अपना पति मान चुकी थीं। उन्होंने ठान लिया था कि विवाह करेंगी तो भोलेनाथ के साथ ही करेंगी। देवता भी यही चाहते थे। देवताओं ने माता पार्वती के विवाह का प्रस्ताव शिव जी के पास भेजा। जिसे भोलेनाथ ने ठुकरा दिया। लेकिन माता पार्वती ने हार नहीं मानी और कठोर तपस्या शुरू कर दी। देवी पार्वती की तपस्या से तीनों लोक में हाहाकार मच गया। शिव पार्वती के तप से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर कहा कि उनके साथ रहना आसान नहीं होगा, इसलिए आप किसी राजकुमार से विवाह कर लें। लेकिन माता पार्वती ने कहा कि वह उन्हें ही अपना पति मान चुकी हैं। अब उनके सिवा किसी और से विवाह नहीं करेंगी। आखिरकार पार्वती के इस असीम प्रेम को देखकर भोलेनाथ विवाह के लिए मान गए।
इस महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती से सीखें- कैसे चलाएं घर, द्वार और परिवार
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महादेव और माता पार्वती का अप्रतिम प्रेम
- देवी पार्वती और भगवान शिव के अप्रतिम प्रेम से ये पूरा संसार वाकिफ है। कई ऐसे पौराणिक किस्से भी सुनने को मिलते हैं, जहां देवी-देवताओं ने भी स्वयं शिव जी के प्रेम को असीम और अनन्य बताया है। महादेव ने मां पार्वती को अपने आधे अंग पर स्थान दिया है, इसलिए वो अर्धनारीश्वर भी कहे जाते हैं। यही वजह है कि शिव और पार्वती के आगे प्रेम की पराकाष्ठा भी छोटी महसूस होने लगती है। ऐसे में हर पति-पत्नी के मन एक दूसरे के लिए सम्मान का भाव होना चाहिए। सम्मान और बराबरी का भाव होगा तभी गृहस्थी जीवन भी सुखी रहेगा।
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इस महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती से सीखें- कैसे चलाएं घर, द्वार और परिवार
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भगवान भोलेनाथ का परिवार
- भगवान भोलेनाथ के परिवार में चार सदस्य हैं और चारों एक दूसरे से अलग-अलग हैं। भोलेनाथ का वाहन नंदी और गले में सर्प, माता पार्वती का वाहन शेर, गणेश का वाहन चूहा, कार्तिकेय का वाहन मोर। ये चारो वाहन आपस में शत्रु माने जाते हैं, लेकिन जब भोलेनाथ के परिवार में होते हैं सब मिलजुल कर रहते हैं। महादेव का परिवार हमे यही सिखाता है कि परिवार में भले ही लोग अलग-अलग विचारों के हों लेकिन हमेशा मिलजुल कर रहना चाहिए।
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इस महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती से सीखें- कैसे चलाएं घर, द्वार और परिवार
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इसलिए वखास है महाशिवरात्रि का दिन
- मान्यता है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने से उनके भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। वहीं सुहागिन स्त्रियों को महाशिवरात्रि के दिन पूजा और व्रत से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।