Mahashivratri 2022 : इस साल महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि शिवयोग में मनाई जाएगी और चतुर्ग्रही योग भी बनेगा। इस बार शिव और शक्ति के मिलन का यह पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 01 मार्च,मंगलवार को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर ही इस सम्पूर्ण चराचर जगत के आधार हैं अतः मनुष्य निष्काम हो या सकाम,सबको भगवान सदाशिव की आराधना करनी चाहिए। स्कंदपुराण के अनुसार आज जानते हैं कि भोलेनाथ की क्या सेवा करने का क्या फल मिलता है।
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Mahashivratri 2022 : जानिए स्कंदपुराण के अनुसार शिवजी के निमित्त सेवा करने से क्या मिलता है पुण्य
Tue, 22 Feb 2022 11:27 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 22 Feb 2022 11:27 AM IST
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- जो परमात्मा शिव की प्रसन्नता के लिए धूप निवेदन करते हैं धूप आरती करते हैं,वे पिता और नाना दोनों के कुल का कल्याण करते हैं तथा भविष्य में यशस्वी होते हैं।
- जो लोग भगवान हरी-हर के सम्मुख दीपदान करते हैं,वे भविष्य में तेजस्वी होते हैं और शिवलोक में स्थान पाते हैं।
- जो भक्त शिवजी को नैवेद्य निवेदन करते हैं वे एक-एक ग्रास में सम्पूर्ण यज्ञ का फल पाते हैं।
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- जो हरिहर भक्त टूटे हुए शिवमंदिर को पुनः बनवा देते हैं वे निसंदेह द्विगुण फल के भागी होते हैं।
- जो मनुष्य ईंट या पत्थर से भगवान शिव या विष्णु के लिए नूतन मंदिर निर्माण करते हैं,वे तब तक स्वर्गलोक में आनंद भोगते हैं,जब तक पृथ्वी पर उनकी वह कीर्ति स्थित रहती है।
- जो भगवान शिव के लिए अनेक मंजिलों का मंदिर बनवाते हैं या फिर मंदिरों की सफाई और सफेदी आदि करवाते हैं वे प्राणीजन इस लोक सुखपूर्वक रहकर उत्तम गति को प्राप्त होते हैं।
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- जो पुरुष अथवा स्त्रियां भक्ति पूर्वक शिवमंदिर के आंगन में विविध रंगों से रंगोली बनाती हैं या चौक पूर्ती हैं,वे सर्वश्रेष्ठ शिवधाम में पहुंचकर दिव्य रूप को प्राप्त करते हैं।
- जो पुण्यात्मा मनुष्य भगवान शिव के मंदिर में जोर से एवं मधुर आवाज करने वाला घंटा बांधते हैं,वे त्रिलोक में यशस्वी और कीर्तिमान होते हैं।
- जिनके मुख से 'नमः शिवाय' यह पंचाक्षर मंत्र सदा उच्चारित होता रहता है,वे मनुष्य शिव का ही स्वरुप हैं एवं जो एक,दो या तीनों समय भगवान शिव का दर्शन करता है,वह सुखी होकर समस्त दुखों से छूट जाता है।