Mahalaya Amavasya 2022: पंचांग के अनुसार पितृपक्ष का समापन महालया अमावस्या पर माना जाता है। पितृपक्ष महत्वपूर्ण दिन माने जाते हैं। इन दिनों में पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। पितृपक्ष पूरे 15 दिनों का होता है इसके आखिरी दिन पर अमावस्या पड़ती है। इसी अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या भी कहते हैं। अन्य शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक वर्ष इसी दिन मां दुर्गा धरती पर आती हैं। महालया से ही पश्चिम बंगाल में 10 दिवसीय वार्षिक दुर्गा पूजा उत्सव का आरंभ हो जाता है। सर्व पितृ अमावस्या इस वर्ष आज यानी 25 सितंबर, रविवार को मनाया जा रहा है। महालया अमावस्या पर लोग पवित्र नदी में स्नान करके अपने पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर उनकी विदाई के काम करते हैं पितृपक्ष और महालय अमावस्या पितरों को याद करने का दिन माना जाता है। आइए जानते हैं अमावस्या का मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
{"_id":"632586e0bc773943a605da99","slug":"mahalaya-amavasya-2022-date-time-importance-muhurat-and-why-it-is-celebrated-in-hindi","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Mahalaya Amavasya 2022: आज है सर्व पितृ अमावस्या, जानें इसका धार्मिक महत्व और मुहूर्त","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Mahalaya Amavasya 2022: आज है सर्व पितृ अमावस्या, जानें इसका धार्मिक महत्व और मुहूर्त
Sun, 25 Sep 2022 06:59 AM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Sun, 25 Sep 2022 06:59 AM IST
विज्ञापन
कब पड़ेगी आश्विन मास की अमावस्या,
- फोटो : अमर उजाला
कब पड़ेगी आश्विन मास की अमावस्या,
- फोटो : पितृपक्ष
महालया 2022: शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 4:35 से शुरू होकर 5:23 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : प्रातः सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
गोधुली मुहूर्त: सायं 06:02 बजे से सायं 6:26 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 2:13 बजे से 3:01 बजे तक ।
ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 4:35 से शुरू होकर 5:23 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : प्रातः सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
गोधुली मुहूर्त: सायं 06:02 बजे से सायं 6:26 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 2:13 बजे से 3:01 बजे तक ।
महालय अमावस्या का महत्व
- फोटो : SOCIAL MEDIA
महालया अमावस्या का महत्व
पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के अलावा, यह दिन सत्य और साहस की शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि देवी दुर्गा को सभी सर्वोच्च देवताओं की शक्तियों द्वारा महिषासुर नाम के एक राक्षस को मारने के लिए बनाया गया था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसने पृथ्वी पर विनाश किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
महालय अमावस्या पर क्या करें
- फोटो : अमर उजाला
महालया अमावस्या पर क्या करें
- महालया अमावस्या के दिन ब्रहमाणों को भोजन कराकर उनको दान दक्षिणा दें।
- मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
- वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते है।
- महालया अमावस्या के दिन पितरों को दूध, तिल, कुशा, पुष्प मिश्रित जल से तर्पण करें।
विज्ञापन
महालय अमावस्या पर क्या करें
- फोटो : अमर उजाला
- पूर्वजों के निमित्त उनकी पसंद का भोजन बनाकर कौए, गाय, कुत्ते को दें।
- महालया पर ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान दक्षिणा दें।
- मान्यता है कि महालया अमावस्या पर श्राद्ध करने से पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है और जन्म मरण के बंधन से वो मुक्त हो जाते हैं।
- अमावस्या पर उन पितरों का तर्पण करें जिनकी मृत्यु तिथि की जानकारी न हो।