26 दिसंबर, गुरुवार को सूर्य ग्रहण हुआ और अब यह ग्रहण सम्पात हो गया है। अगला सूर्य ग्रहण 21 जून को लगेगा लेकिन इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं रहेगा। सूर्य ग्रहण का धार्मिक आधार पर बहुत अधिक महत्व है, वेद पुराणों में भी इस जिक्र है। महाभारत के युद्ध में तो सूर्य ग्रहण ने अहम भूमिका निभाई थी।
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महाभारत युद्ध की शुरुआत जब हुई उस समय ग्रहण काल चल रहा था
धर्मिक ग्रंथो के अनुसार महाभारत युद्ध की शुरुआत जब हुई उस समय ग्रहण काल चल रहा था और युद्ध के अंतिम दिन भी ग्रहण लगा हुआ था। इसके साथ ही युद्ध के बीच में भी एक सूर्यग्रहण हुआ था, जिसने इस युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। अगर यह ग्रहण नहीं लगा होता तो शायद इस युद्ध का नतीजा कुछ और ही होता। अगली स्लाइड्स में जानते हैं इस सूर्य ग्रहण ने कैसे निभाई इस युद्ध में अहम भूमिका...
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महाभारत के भीषण युद्ध में कुल 3 ग्रहण लगे थे
धार्मिक कथाओं के अनुसार महाभारत के भीषण युद्ध में कुल 3 ग्रहण लगे थे। एक शुरुआत में एक अंत में और एक इस युद्ध के मध्य में। दूसरा और महत्वपूर्ण ग्रहण उस समय लगा था जब महान योद्धा अर्जुन के प्राण संकट में थे। अर्जुन ने महाभारत के युद्ध में एक दिन प्रतिज्ञा ली कि वो सूर्यास्त से पहले अगर जयद्रथ को नहीं मार पाएं तो वो खुद अग्निसमाधि ले लेंगे। तब कौरवों ने जयद्रथ को बचाने के लिए सुरक्षा घेरा बना लिया और अर्जुन को जयद्रथ तक पहुंचने नहीं दिया, लेकिन उस दिन सूर्यग्रहण होने के कारण कुछ समय के लिए सभी जगह अंधेरा हो गया और कौरवों को लगा की सूर्यास्त्र हो गया है।
ग्रहण लगते ही जयद्रथ सुरक्षा घेरे से बहार निकलकर अर्जुन के सामने आ गया और बोला सूर्यास्त हो गया है अब अग्निसमाधि लो। इसी बीच कुछ समय बाद सूर्य ग्रहण खत्म हो गया और सूर्य चमकने लगा। ग्रहण के खत्म होते ही अर्जुन ने जयद्रथ का वध किया। इस तरह सूर्य ग्रहण के कारण अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा को पूरा कर पाएं।