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इस तरह कुंती, गांधारी और धृतराष्ट्र को मिली थी दर्दनाक मौत

Sun, 20 Sep 2015 11:42 AM IST
Updated Sun, 20 Sep 2015 11:42 AM IST
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इस तरह कुंती, गांधारी और धृतराष्ट्र को म‌िली थी दर्दनाक मौत

mahabharat kunti gandhari and dhrishtrashtra death

महाभारत युद्ध के बाद जब युध‌िष्ठ‌िर हस्त‌िनापुर के महाराज बने तब कौरवों के प‌िता धृतराष्ट्र अपनी पत्‍नी गांधारी और पांडवों की माता कुंती के साथ वन के ल‌िए प्रस्‍थान करने की तैयारी करने लगे। जब यह तीनों


युध‌िष्ठि‌र के पास वन जाने की आज्ञा लेने पहुंचे तो युध‌िष्ठ‌िर सह‌ित अन्य भाइयों ने इन्‍हें वन जाने से रोक ल‌िया।

इस तरह कुंती, गांधारी और धृतराष्ट्र को म‌िली थी दर्दनाक मौत

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ले‌क‌िन भीम कौरवों के प्रत‌ि अपनी ईर्ष्या को अध‌िक द‌िनों तक दबाकर नहीं रख पाए और जब तब धृतराष्ट्र को ताना मारने लगे। एक द‌िन भीम के मुंह से कुछ ऐसी बात न‌िकल गई जो धृतराष्ट्र के हृदय में चुभ गई और उन्होंने तय कर ल‌िया क‌ि अब वह राजमहल में नहीं रहेंगे। धृतराष्ट्र गंधारी को लेकर वन जाने लगे तो कुंती भी साथ में वन जाने की ज‌िद्द करने लगी।

इस तरह कुंती, गांधारी और धृतराष्ट्र को म‌िली थी दर्दनाक मौत

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युध‌िष्ठ‌िर ने इस बार भी इन्हें मनाने की खूब कोश‌िश की लेक‌िन तीनों नहीं माने। इसी समय वेदव्यास जी भी राजमहल में पधारे और युध‌िष्ठ‌िर को तीनों को वन जाने की आज्ञा देने के ल‌िए मना ल‌िया। वेदव्यास जी अपने साथ ही धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती को साथ लेकर वन में चले गए।
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कई वर्षों तक तीनों वानप्रस्‍थ आश्रम यानी साधु संयासी की तरह जीवन यापन करते हुए वन में रहे। राजसी जीवन से वनवासी की तरह जीवन यापन करने से इनका बुढ़ा शरीर कमजोर होने लगा।

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एक द‌िन संयोगवश वन में आग लग गई। सभी लोग अपनी-अपनी जान बचाकर भागने लगे। धृतराष्ट्र भी गांधारी और कुंती के साथ भागे लेक‌िन कमजोर शरीर के कारण यह अध‌िक भाग नहीं सके और वन की आग में घ‌िर गए।

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