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magh month 2021: 29 जनवरी से शुरू हुआ माघ का महीना, जानिए क्यों माना गया है इतना खास

Fri, 29 Jan 2021 07:22 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 29 Jan 2021 07:22 AM IST
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magh month 2021 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह साल का 11वां माह होता है। 29 जनवरी 2021 दिन शुक्रवार से माघ मास की शुरुआत हो गई है। माघ माह में प्रयागराज में माघ मेला भी लगता है। इस माह में शाही स्नान और दान का बड़ा महत्व माना जाता है। यह माह पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। शास्त्रों में भी इस माह को बहुत शुभफलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस माह में कहा जो व्यक्ति पवित्र नदी में स्नान करके दान करता है उसे हर पाप से मुक्ति प्राप्त होती है। इस माह में कई बड़े पर्व जैसे मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी भी पड़ते हैं जो इस माह को और भी शुभ बनाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि क्यों इतना खास माना गया है यह माह और स्नान दान का क्या है महत्व

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magh mela prayagraj - फोटो : प्रयागराज

शास्त्रों में माघ के महीने को स्नान, दान और उपवास के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। माघ माह के दौरान पवित्र नदी में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य नारायण की कृपा होती है। माघ माह के बारे में मान्यता है कि जो मनुष्य इस महीने में भक्तिभाव से पवित्र नदी में स्नान करता है, उसे पापों से मुक्ति मिल जाती है और भगवान विष्णु की कृपा से वह सभी सुखों को प्राप्त करता है। इसके अलावा पवित्र नदी में स्नान करने से शरीर में सकारात्मकता का संचार होता है। इस माह में पवित्र नदी में स्नान और दान पुण्य करने के व्यक्ति को रोग एवं विकारों के मुक्ति मिलती है। माघ माह में पशुओं को चारा खिलाना और जरूरतमंदों की सेवा करना बहुत शुभफलदायी रहता है।

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माघ माह 2021 - फोटो : प्रयागराज
 क्या होता है कल्पवास
कहां जाता है कि माघ माह में  धर्मराज  युधिष्ठिर कल्पवास किया था, इसलिए माघ माह में कल्पवास करने का बहुत महत्व माना जाता है। कुछ लोग मकर संक्रांति से कल्पवास आरंभ करते हैं तो कुछ लोग पौष पूर्णिमा से कल्पवास का आरंभ करते हैं। कल्पवास की अवधि में व्यक्ति कुछ नियमों के साथ नदी के तट पर रहता है। कल्पवास का अर्थ होता है कि संगम पर कुछ नियमों का पालन करते हुए वेदअध्ययन करना। यह पूरी प्रक्रिया नियमों को साथ करना बहुत आवश्यक होता है। कल्पवास एक रात्रि, तीन दिन, इक्कीस दिन, या फिर 45 दिन एक साल का भी होता है। कुछ लोग जीवन भर कल्पवास में रहते हैं। कल्पवास का अर्थ होता है कि एक मास यानि ब्रह्मा का एक दिन। कल्पवास करने से मन शुद्ध होता है और व्यक्ति आध्यात्मिक बनता है।
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माघ मास 2021 - फोटो : प्रयागराज
माघ माह के खास होने का कारण

कथा के अनुसार महाभारत युद्ध के दौरान मारे गए अपने रिश्तेदारों को सदगति दिलाने हेतु धर्मराज युधिष्ठिर ने मार्कण्डेय ऋषि के कहने पर कल्पवास किया था। इसके अलावा एक अन्य कथा के अनुसार गौतमऋषि द्वारा जब इंद्रदेव को शापित किया गया, तब उन्होंने भी माघ स्नान किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें के श्राप से मुक्ति मिली थी। इस दिन पवित्र नदियों पर शाही स्नान भी किया जाता है। लोग भारी संख्या में नदी के तटों पर जुटते हैं।

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