भगवान शिव की वेशभूषा सभी देवताओं से अलग है। वे श्मशान के निवासी हैं। अपने सिर पर चंद्रमा, केश में गंगा और गले में सर्प धारण करते हैं। शिव को भांग और धतूरे का भोग लगाया जाता है। शिव का यह स्वरूप विचित्र और रहस्यमय होने के साथ हमें सही ठंग से जीवन जीने की कला सिखाता है।
भगवान शिव से जुड़ी हर एक चीज सिखाती है जीवन जीने का सही तरीका
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भगवान भोलेनाथ ने अपने मस्तक पर चंद्र को धारण किया है। चंद्रमा से हमें शीतलता और शांति का अनुभव होता है। भगवान शिव के मस्तक के चंद्र को देखकर हमें से यह सीख मिलती है कि परिस्थिति जो भी हो हमें अपने धैर्य को बनाए रखना चाहिए और मन को नियंत्रित रखना चाहिए।
भगवान शिव अपने गले में सर्प धारण करते है। कैलाश पर्वत पर रहते हैं। नंदी की सवारी करते हैं। भूत पिशाच, देवता गण, पशु-पक्षी, कीट सभी भगवान शिव के साथ रहते हैं। भगवान शिव के इस स्वरूप में हमें प्रकृति के प्रति उनका प्रेम दिखता है। और में भी प्रकृति के करीब रहने की सीख मिलती है।