प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दाऊदी बोहरा समुदाय के मौजूदा सर्वोच्च धर्मगुरू सैयदना मुफ़द्दल सैफुद्दीन के कार्यक्रम में शामिल होना इस समय खबरों की खबर में है। सैयदना मुफ़द्दल सैफुद्दीन इन दिनों अपने मध्य प्रदेश प्रवास के तहत इंदौर में हैं। 6 सितंबर को इंदौर पहुंचे थे और 25 सितंबर तक वहां रहेंगे। इस दौरान वे मोहर्रम के मौक़े पर वाअज (प्रवचन) फरमाएंगे। जिस धार्मिक गुरु सैयदना को को मध्य प्रदेश सरकार ने राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है, आइए जानते हैं उनके और दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ी खास बातों को —
दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ी 8 बड़ी बातें जो दूसरों से बनाती हैं अलग
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गुरू नहीं एक तरह से शासक
आम धर्मगुरुओं के मुकाबले सैयदना का अपने समुदाय में एक अलग ही रुतबा है, एक तरह से वे अपने समुदाय के शासक हैं। मुंबई में अपने भव्य और विशाल आवास सैफ़ी महल में अपने विशाल कुनबे के साथ रहते हुए वे हर आधुनिक भौतिक सुविधाओं का तो उपयोग करते हैं, लेकिन अपने सामुदायिक अनुयायियों पर शासन करने के उनके तौर तरीके मध्ययुगीन राजाओं-नवाबों की तरह हैं। उनकी नियुक्ति भी योग्यता के आधार पर या लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि वंशवादी व्यवस्था के तहत होती है, जो कि इस्लामी उसूलों के अनुरूप नहीं हैं।
ऐसा है समुदाय का इतिहास
दाऊदी बोहरा समुदाय की विरासत फातिमी इमामों से जुड़ी है, जिन्हें पैगंबर हज़रत मोहम्मद का वंशज माना जाता है। यह समुदाय मुख्य रूप से इमामों के प्रति ही अपना अकीदा (श्रद्धा) रखता है। दाऊदी बोहराओं के 21वें और अंतिम इमाम तैयब अबुल कासिम थे. उनके बाद 1132 से आध्यात्मिक गुरुओं की परंपरा शुरू हो गई, जो दाई-अल-मुतलक सैयदना कहलाते हैं। दाई-अल-मुतलक का मतलब होता है-सुपर अथॉरिटी यानी सर्वोच्च सत्ता, जिसके निजाम में कोई भी भीतरी या बाहरी शक्ति दखल नहीं दे सकती या जिसके आदेश-निर्देश को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती। सरकार या अदालत के समक्ष भी नहीं।
समृद्ध और समर्पित होते हैं समाज के लोग
बोहरा' गुजराती शब्द 'वहौराउ' अर्थात 'व्यापार' का अपभ्रंश है, यह समुदाय मुस्ताली मत का हिस्सा है, जो 11वीं शताब्दी में उत्तरी मिस्र से धर्म प्रचारकों के माध्यम से भारत में आया था। दाऊदी बोहरा समुदाय को आम तौर पर पढा-लिखा, मेहनती, कारोबारी और समृद्ध होने के साथ ही आधुनिक जीवनशैली वाला है लेकिन साथ ही धर्मभीरू समुदाय माना जाता है। अपनी इसी धर्मभीरुता के चलते वह अपने धर्मगुरू के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते हुए उनके हर उचित-अनुचित आदेशों का निष्ठापूर्वक पालन करता है।
सैयदना का सामाजिक-धार्मिक तंत्र
देश-विदेश में जहां-जहां भी बोहरा धर्मावलंबी बसे हैं, वहां सैयदना की ओर से अपने दूत नियुक्त किए जाते हैं, जिन्हें आमिल कहा जाता है। ये आमिल ही सैयदना के फरमान को अपने समुदाय के लोगों तक पहुंचाते हैं और उस पर अमल भी कराते हैं। स्थानीय स्तर पर सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों पर भी इन आमिलों का ही नियंत्रण रहता है। एक निश्चित अवधि के बाद इन आमिलों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला भी होता रहता है।