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कहीं शिव के गिरे आंसू तो कहीं सती का सिर, जानें पाकिस्तान के चमत्कारी मंदिरों का रहस्य

Tue, 12 Feb 2019 12:56 PM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Madhukar Mishra Updated Tue, 12 Feb 2019 12:56 PM IST
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know history and importance of amazing Pakistani Hindu temple
पाकिस्तान के हिंदू मंदिर
विश्व के सबसे प्राचीन सनातन धर्म को मानने वाले न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। एक समय जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा नहीं हुआ था, तब पाकिस्तान वाले क्षेत्र में हजारों ऐतिहासिक मंदिर थे। हिंदुस्तान से अलग होने के बाद पाकिस्तान में अनेको मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया या फिर उपेक्षित छोड़ दिया गया। लेकिन आज भी पाकिस्तान की सरजमीं पर सनातन परंपरा से जुड़े कई हिंदू मंदिर हैं, जिनका पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है।

हिंगलाज देवी मंदिर 

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हिंगलाज मंदिर
हिंगलाज माता मंदिर

पाकिस्तान में जब हम हिंदू मंदिरों की बात करते हैं तो सबसे पहला नाम उस शक्तिपीठ का आता है जो पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान में स्थित है। आद्याशक्ति के इस मंदिर को हिंगलाज माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस पावन शक्तिपीठ की देखरेख हिंदू समुदाय के साथ मुस्लिम भी करते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग इसे चमत्कारिक स्थान मानते हैं। 51 शक्तिपीठों में से एक हिंगलाज माता की मंदिर यात्रा के दौरान कुछ-कुछ वैष्णों माता के मंदिर की यात्रा का आभाास होता है, क्योंकि यह मंदिर भी दुर्गम रास्तों से होते हुए उंची पहाड़ियों पर गुफा में स्थित है।

यह मंदिर हिंगला नदी के किनारे सुरम्य पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। यहां माता हिंगलाज एक गुफा में स्थित मंदिर में विराजमान हैं। इसके पौराणिक इतिहास पर नजर डालें तो 2000 साल पहले भी इसके यहां पर मौजूद होने का उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटकर यहां पर देवी सती का सिर गिरा था। इसलिए यह स्थान चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। पाकिस्तान में मुसलमान देवी हिंगलाज को नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहते हैं। इस स्थान पर आकर हिंदू और मुसलमान का भेदभाव मिट जाता है। दोनों ही समुदाय के लोग यहां भक्तिपूर्वक माता की पूजा करते हैं।
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पाकिस्तान के हिंदू मंदिर
इस तरह बचे थे क्षत्रियों के प्राण
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जो व्यक्ति एक बार माता हिंगलाज के दर्शन कर लेता है, उसे पूर्वजन्म के कर्मों का दंड नहीं भुगतना पड़ता है। मान्यता है कि परशुराम जी द्वारा 21 बार क्षत्रियों का अंत किए जाने के प्रण से बचने के लिए कुछ क्षत्रियों ने माता हिंगलाज से अपनी जान की रक्षा की गुहार लगाई थी। जिसके बाद माता हिंगलाज ने क्षत्रियों को ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया। तब कहीं जाकर उन्हें परशुराम से अभय दान मिल पाया।
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पंचमुखी हनुमान मंदिर 

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प्रतिकात्मक तस्वीर
कराची का हनुमान मंदिर

पाकिस्तान के कराची स्थित हनुमान मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां पर विराजमान हनुमान जी पिछले 17 लाख वर्षों से अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करते चले आ रहे हैं। मान्यता यह भी है कि हनुमान जी को सच्चे मन से मानने वाला व्यक्ति यहां से कभी खाली हाथ वापस नहीं जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन इस हनुमान मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर की महिमा को इस प्रकार भी जाना जा सकता है कि न सिर्फ पाकिस्तानी हिंदू बल्कि भारत से भी श्रद्धालु इस मंदिर में बजरंगबली के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। संकटमोचक श्री हनुमान जी के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां बालाजी की प्रतिमा जमीन से प्रकट हुई थी।


 
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कटास राज मंदिर

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पाकिस्तान के हिंदू मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कटासराज मंदिर

हनुमान मंदिर की तरह पाकिस्तान का प्राचीन शिव मंदिर भी देश-दुनिया में बसे तमाम हिंदुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के चकवाल जिले में स्थित मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी से नवीं शताब्दी के मध्य माना जाता है। भगवान शिव का यह पौराणिक मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से तकरीबन 40 कि.मी. की दूरी पर कटस नाम की एक पहाड़ी पर स्थित है। माना जाता है कि महाभारत काल में यक्ष और युद्धिष्ठिर की बीच यहीं पर संवाद हुआ था।

कटासराज मंदिर के कुंड के बारे में मान्यता है कि यह भगवान शिव के आंसुओं से बना है। जो कभी सती की मृत्यु के बाद दु:खी भगवान शिव के आंसुओं से भरा था। यहां पर आने वाला श्रद्धालु इस पावन कुंड में तन और मन के सुख की कामना करता हुआ यहां पर एक बार जरूर स्नान करता है।
 
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