Manikarnika Ghat: काशी भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसे बनारस और वाराणसी के नामों से भी जाना जाता है। इसकी गणना दुनिया के सबसे पुराने बसे शहरों में भी की जाती है। धार्मिक ग्रंथों की मानें तो काशी देवों के देव महादेव की नगरी है और इस शहर को भगवान शिव द्वारा स्थापित माना गया है।
Manikarnika Ghat: काशी के मणिकर्णिका घाट पर इन लोगों का नहीं जलता शव, बेहद रहस्यमयी है वजह
Manikarnika Ghat: काशी भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसे बनारस और वाराणसी के नामों से भी जाना जाता है। इसकी गणना दुनिया के सबसे पुराने बसे शहरों में भी की जाती है।
साधुओं का नहीं जलता शव
मणिकर्णिका घाट पर कभी भी साधुओं का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, क्योंकि उन्हें हमेशा जल समाधि दी जाती है।
चर्म रोग वाले व्यक्ति का नहीं जलता शव
जिन लोगों को चर्म रोग होता है, उनका शव कभी भी मणिकर्णिका घाट पर नहीं जलाया जाता है। कहते हैं, यदि कुष्ट रोगी व्यक्ति को जलाया जाएगा, तो हवा में उस बीमारी के बैक्टीरिया फैल सकते हैं, जिससे दूसरे लोग उसके संपर्क में आ सकते हैं।
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छोटे बच्चे का नहीं जलता शव
ऐसा कहा जाता है कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर कभी किसी छोटे बच्चे का शव नहीं जलाया जाता है। बता दें, बच्चों को हमेशा भगवान का रूप माना गया है, इसलिए उनके शव को मिट्टी में दफनाया जाता है।
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गर्भवती महिला का नहीं जलता शव
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मणिकर्णिका घाट पर किसी भी गर्भवती महिला का अंतिम संस्कार नहीं होता है। यदि किसी गर्भवती महिला के शव को जलाया जाएगा, तो उसका पेट फट सकता है। इससे बच्चा आकस्मिक रूप से बाहर आ सकता है। इसलिए शव को जलाने की मनाही होती है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।