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Manikarnika Ghat: काशी के मणिकर्णिका घाट पर इन लोगों का नहीं जलता शव, बेहद रहस्यमयी है वजह

Fri, 18 Apr 2025 02:53 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 18 Apr 2025 02:53 PM IST
सार

Manikarnika Ghat: काशी भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसे बनारस और वाराणसी के नामों से भी जाना जाता है। इसकी गणना दुनिया के सबसे पुराने बसे शहरों में भी की जाती है। 

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Kashi Manikarnika Ghat Antim Sanskar Niyam know manikarnika ghat history in hindi
काशी भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसे बनारस और वाराणसी के नामों से भी जाना जाता है। इस - फोटो : adobe

Manikarnika Ghat: काशी भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है, जिसे बनारस और वाराणसी के नामों से भी जाना जाता है। इसकी गणना दुनिया के सबसे पुराने बसे शहरों में भी की जाती है। धार्मिक ग्रंथों की मानें तो काशी देवों के देव महादेव की नगरी है और इस शहर को भगवान शिव द्वारा स्थापित माना गया है। 



कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु शिव नगरी यानी काशी में हो, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति अवश्य होती हैं। इस दौरान यहां के मणिकर्णिका घाट को लेकर भी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। 

बता दें, काशी के मणिकर्णिका घाट को मोक्षदायिनी घाट कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां पर शव का अंतिम संस्कार करने से उस व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती हैं। परंतु इस घाट पर इन चार लोगों के शव को जलाने की मनाही होती हैं। आइए इसके पीछे की वजह के बारे में जानते हैं... 

Kashi Manikarnika Ghat Antim Sanskar Niyam know manikarnika ghat history in hindi
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर कभी भी साधुओं का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है। - फोटो : adobe

साधुओं का नहीं जलता शव
मणिकर्णिका घाट पर कभी भी साधुओं का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, क्योंकि उन्हें हमेशा जल समाधि दी जाती है।
 

Kashi Manikarnika Ghat Antim Sanskar Niyam know manikarnika ghat history in hindi
जिन लोगों को चर्म रोग होता है, उनका शव कभी भी मणिकर्णिका घाट पर नहीं जलाया जाता है। - फोटो : adobe

चर्म रोग वाले व्यक्ति का नहीं जलता शव
जिन लोगों को चर्म रोग होता है, उनका शव कभी भी मणिकर्णिका घाट पर नहीं जलाया जाता है। कहते हैं,  यदि कुष्ट रोगी व्यक्ति को जलाया जाएगा, तो हवा में उस बीमारी के बैक्टीरिया फैल सकते हैं, जिससे दूसरे लोग उसके संपर्क में आ सकते हैं।
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ऐसा कहा जाता है कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर कभी किसी छोटे बच्चे का शव नहीं जलाया जाता है। - फोटो : adobe

छोटे बच्चे का नहीं जलता शव
ऐसा कहा जाता है कि काशी के मणिकर्णिका घाट पर कभी किसी छोटे बच्चे का शव नहीं जलाया जाता है। बता दें, बच्चों को हमेशा भगवान का रूप माना गया है, इसलिए उनके शव को मिट्टी में दफनाया जाता है। 
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धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मणिकर्णिका घाट पर किसी भी गर्भवती महिला का अंतिम संस्कार नहीं होता है। - फोटो : Freepik.com

गर्भवती महिला का नहीं जलता शव 
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मणिकर्णिका घाट पर किसी भी गर्भवती महिला का अंतिम संस्कार नहीं होता है। यदि किसी गर्भवती महिला के शव को जलाया जाएगा, तो उसका पेट फट सकता है। इससे बच्चा आकस्मिक रूप से बाहर आ सकता है। इसलिए शव को जलाने की मनाही होती है।

                
        
                
         
        

                
        
                
         
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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