लाल साड़ी की चमक, हाथों में मेहंदी की खुशबू, चूड़ियों की खनक और माथे पर सजे सिंदूर-बिंदी से करवा चौथ का उत्सव और भी खास हो जाता है। सुहाग की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना के साथ महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करके पूजा की तैयारी करती हैं। कोई शादी की चुनरी निकालती है, तो कोई मां की दी हुई चूड़ियां पहनने की तैयारी करती है।
करवा चौथ 2026: क्या सोलह श्रृंगार के बिना अधूरा रहता है व्रत? जानें क्या कहती हैं मान्यताएं
क्या पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखे जाने वाले इस व्रत में सभी 16 श्रृंगार करना अनिवार्य है? यदि कोई चीज छूट जाए, तो क्या पूजा या व्रत का फल अधूरा रह जाता है? आइए करवा चौथ 2026 से पहले इन पारंपरिक मान्यताओं के बारे में जानते हैं।
सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी 16 चीजें शामिल हैं?
सोलह श्रृंगार की सूची अलग-अलग क्षेत्रों में बदल सकती है। कहीं महावर और केश सज्जा को महत्व दिया जाता है, तो कहीं इत्र और दूसरे प्रसाधन शामिल किए जाते हैं। एक प्रचलित सूची में ये 16 चीजें आती हैं:
बिंदी: माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी या कुमकुम।
सिंदूर: मांग में लगाया जाने वाला सिंदूर।
मांग टीका: माथे पर पहना जाने वाला आभूषण।
काजल: आंखों का श्रृंगार।
नथ: नाक में पहना जाने वाला आभूषण।
कर्णफूल: कानों के झुमके या बालियां।
हार या मंगलसूत्र: गले का पारंपरिक आभूषण।
मेहंदी: हाथों और पैरों पर रचाई जाने वाली मेहंदी।
चूड़ियां: कलाइयों में पहना जाने वाला श्रृंगार।
बाजूबंद: बांह पर पहना जाने वाला आभूषण।
अंगूठी: उंगलियों में पहना जाने वाला आभूषण।
कमरबंद: कमर पर पहना जाने वाला आभूषण।
पायल: पैरों में पहना जाने वाला आभूषण।
बिछिया: पैर की उंगलियों में पहना जाने वाला आभूषण।
गजरा: फूलों से बालों को सजाना।
इत्र: सुगंध के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्रसाधन।
यह सूची प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसके क्रम और वस्तुओं में अंतर हो सकता है।
सोलह श्रृंगार का शुक्र ग्रह से क्या संबंध है?
वैदिक ज्योतिष में शुक्र को सौंदर्य, प्रेम, आकर्षण, वस्त्र, आभूषण और दांपत्य सुख से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से श्रृंगार की परंपरा का संबंध शुक्र ग्रह से बताया जाता है। हालांकि, केवल गहने पहनने से कुंडली में शुक्र मजबूत हो जाता है, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रह का प्रभाव उसकी राशि, भाव, दृष्टि और दशा जैसी स्थितियों पर निर्भर करता है।
चंद्रमा की सोलह कलाओं से कैसे जुड़ा है श्रृंगार?
करवा चौथ की शाम चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। महिलाएं पूजा की थाली सजाकर चंद्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं और परंपरा के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। पारंपरिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक व्याख्याओं में सोलह श्रृंगार को चंद्रमा की सोलह कलाओं से भी जोड़ा जाता है।
श्रृंगार की कोई चीज छूट जाए तो क्या करें?
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
करवा चौथ के व्रत में तैयारियों के दौरान कोई आभूषण या गजरा न मिल पाए, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। किसी एक वस्तु के छूटने से व्रत अधूरा हो जाता है, ऐसा दावा स्पष्ट धार्मिक आधार के बिना नहीं करना चाहिए।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं घर के बड़ों से पूजा की विधि समझ सकती हैं और पहले से सामग्री की सूची बना सकती हैं। हर चीज नई खरीदना भी जरूरी नहीं है। पुराने गहनों और पसंदीदा साड़ी के साथ भी त्योहार की तैयारी की जा सकती है। करवा चौथ का मूल भाव श्रद्धा, प्रेम और वैवाहिक जीवन के मंगल की कामना है।
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